
प्रतीकात्मक फोटो
पूर्वांचल में वाराणसी के बाद अब आजमगढ़ में फोरेंसिक लैब यानि विधि विज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना की जाएगी। यह परियोजना 2021-22 में स्वीकृत हुई थी। अब इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई है। लोक निर्माण विभाग को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। इसके निर्माण में 49 करोड़ रुपए खर्च होंगे। बजट मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। इसका लाभ मऊ और बलिया की पुलिस को भी मिलेगा।
गंभीरवन में चिन्हित की गई है जमीन
शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला के लिए सदर तहसील क्षेत्र के गंभीरवन मे 032 हेक्टेयर यानि 200 गुणे 160 मीटर जमीन उपलब्ध कराई गई है। इसमें स्वायल यानि मिट्टी टेस्टिग का कार्य पूरा हो चुका है। ताकि निर्माण के समय यह निर्धारित हो सके कि नींव कितनी गहरी होगी।
पुलिस को भागदौड़ से मिलेगी मुक्ति
विधि विज्ञान प्रयोगशाला स्थापित होने से पुलिस को भागदौड़ से मुक्ति मिल जाएगी। आपराधिक घटनाओं के साक्ष्य जुटाने में भी यह मददगार साबित होगी। जांच रिपोर्ट भी समय से मिल जाएगी।
अभी दूसरे जिलों के फोरेंसिक लैब पर निर्भर है पुलिस
आपराधिक घटनाओं में वैज्ञानिक साक्ष्यों का परीक्षण कराने के लिए जिले की पुलिस दूसरे जिलों के फोरेंसिक लैब पर निर्भर है। समय से जांच रिपोर्ट न मिलने से विवेचनाएं अधर में लटक जाती हैं। दूसरे जिलों की लैब तक भागदौड़ करने में विवेचक भी कतराते हैं । लैब की स्थापना हो जाने के बाद पुलिस को इस स्थिति से गुजरना नहीं पड़ेगा।
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अपराधी करते हैं नई तकनीकों का इस्तेमाल
वर्तमान में अपराध कि लिए अपराध करने में नई तकनीक इस्तेमाल करते हैं। अपराधी प्रयास करते हैं कि घटनास्थल पर पुलिस को कोई ऐसा सबूत न मिले जिससे उनका सुराग मिले। संगीन मामलों की विवेचना में पुलिस की परेशानी बढ़ जाती है। पुलिस का मानना है कि लैब बनने से उनका काम आसान हो जाएगा।
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किस जिले में क्या है लैब की श्रेणी
वर्तमान में लखनऊ, आगरा, वाराणसी और मुरादाबाद में फोरेंसिक लैब हैं। सरकार की घोषणा के अनुसार कन्नौज, गाजियाबाद में ’ए’ श्रेणी, झांसी, गोरखपुर, प्रयागराज और आजमगढ़ में ’बी’ श्रेणी और फैजाबाद, देवीपाटन, अलीगढ़, गोंडा, बस्ती, चित्रकूट धाम, बांदा, मीरजापुर, बरेली, सहारनपुर में ’सी’ श्रेणी का लैब स्थापित होगा।
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क्या कहते हैं अधिकारी
सहायक अभियांता लोक निर्माण विभाग खंड-5 के सहायक अभियतां मुकेश झा का कहना है कि फोरेंसिक लैब की स्थापना के लिए जमीन तय हो गई है। बजट की मंजूरी के लिए पुलिस महानिदेशालय भेजा गया है। जमीन में स्वायल टेस्टिंग का कार्य हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार जमीन की डीपीआर भेज दी गई है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण शुरू हो जाएगा।
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देरी के कारण बढ़ गया बजट
लोक निर्माण विभाग के मुताबिक लैब निर्माण के लिए पहले 47.05 करोड़ रुपये की डीपीआर यानि डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट पुलिस निदेशालय को भेजी गई थी। उस समय मंजूरी न मिलने से एक साल बाद बजट बढ़ गया। अब इसके निर्माण में 49 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
Published on:
29 Jan 2023 02:23 pm
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