खेती में लगातार नुकसान उठा रहे किसानों के पास सुनहरा अवसर है। अगर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन कर अपनी आमदनी को बढ़ाना चाहते हैं तो गन्ने की नई प्रजाति कोसे-11453, कोसे-13452 व कोसे-92423 की खेती करें। यह प्रजाति अच्छा उत्पादन तो देगी ही साथ ही चीनी भी अधिक तैयार होगी। इससे किसानों को इसे बेचने में भी दिक्कत नहीं होने वाली है।
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. प्राकृतिक आपदा और संसाधनों की कमी के कारण आज किसानों के लिए खेती घाटे का सौदा बन गई है। इससे जहां किसानों की रुचि खेती से घट रही है वहीं वह कर्ज में डूबता जा रहा है। ऐसे में गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान सेवरही किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। संस्थान ने गन्ने की दो नई प्रजातियां विकसित की है। यह प्रजातियां जहां कम लागत में अधिक उत्पादन देंगी वहीं चीनी का उत्पादन भी अधिक होगा। ऐसे में किसान गन्ना के इन प्रजातियों की खेती कर अपनी आमदनी को बढ़ा सकता है।
गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान सेवरही द्वारा विकसित गन्ने की दोनों नई प्रजातियां काफी उन्नतशील है। पूर्वांचल की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर इन प्रजातियों को विकसित किया गया है। यह प्रजातियां प्रति एकड़ 400 क्विंटल तक गन्ने का उत्पादन देंगी, जबकि सामान्य प्रजातियों से 250 से 300 क्विंटल तक गन्ने का उत्पादन मिलता है। गन्ना अनुसंधान संस्थान सेवरही द्वारा तैयार की गई पहली प्रजाति कोसे-11453 की औसत उपज 400 क्विंटल प्रति एकड़ है। इस प्रजाति से नवंबर माह में 11.7 प्रतिशत व मार्च माह में 13.45 प्रतिशत परता चीनी निकलती है। इस प्रजाति का गन्ना मध्यम मोटा और पेड़ी अच्छी होती है।
वहीं दूसरी प्रजाति कोसे-13452 व कोसे-92423 की औसत उपज 350 से 400 क्विंटल है। इससे नवंबर माह में 11.72 प्रतिशत तथा मार्च माह में 14 प्रतिशत चीनी का परता आता है। इस प्रजाति का गन्ना सीधा और मध्यम मोटा होता है। जिला गन्ना अधिकारी आजमगढ़ के मुताबिक पांच साल तक पूर्वाचल में गन्ने की उपज बढ़ाने वाली प्रजाति को 0238 अब पुरानी हो चुकी है। यह प्रजाति रेड राट रोग लगने से प्रभावित हो रही है। ऐसे में किसान गन्ने की नई प्रजातियों लगाकर अच्छा उत्पादन ले सकते हैं।