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आजमगढ़ में सपा ने जीतीं सबसे ज्यादा सीटें, लेकिन अध्यक्ष बनवाना अखिलेश के लिए बड़ी चुनौती

-आजमगढ़ किसका होगा अध्यक्ष, सपा, बसपा, भाजपा बहुमत से दूर, निर्दलीय तय करेंगे किसके सिर सजेगा ताज -कांग्रेस को सिर्फ एक सीट पर मिली सफलता, एआईएमआईएम व सुभासपा नहीं कर सकी कोई करिश्मा, एक एक सीट पर करना पड़ा संतोष -26 सीटों पर निर्दलियों ने हासिल की सफलता, तीन सीट का परिणाम आना बाकी -कई सीटों पर हारे हुए प्रत्याशियों को जिताने का लगा आरोप
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पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. पिछले एक दशक से लगातार जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर काबिज समाजवादी पार्टी को पार्टी मुखिया अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में झटका लगा है। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में सपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर जरूर उभरी है लेकिन बहुमत से काफी दूर है। वहीं बसपा और भाजपा भी कोई करिश्मा नहीं कर सकी है। ऐसे में चर्चा इस बात की है कि आखिर जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष होगा किसका। छोटे दल किसके साथ जाएंगे। किंग मेकर बन चुके निर्दलीय किसके साथ जाएंगे। निर्दलीय जिसके साथ जाएंगे उसका अध्यक्ष बनना तय है। सभी दल इन्हें साधने में जुटे हैं।

बता दें कि जिले में जिला पंचायत सदस्य की 84 सीटों पर मतदान हुआ था। अभी तक 81 सीटों का परिणाम घोषित हुआ है। तीन सीटों का परिणाम आना अभी बाकी है। अब तक घोषित 81 सीटों के परिणाम में भाजपा के खाते में 10 सीटें आई है। वहीं सपा ने 25 व बसपा ने 14 सीटों पर जीत हासिल की है। इसके अलावा एआईएमआईएम को 01, कांग्रेस को 01, उलेमा कौंसिल को 01, अपना दल को 01, आम आदमी पार्टी को 01, सुभासपा को 01 सीट मिली है। 26 सीटों पर निर्दल उम्मीदवारों को सफलता मिली है।

सपा, बसपा और भाजपा की नजर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर है। भाजपा की तरफ से भोला सेठ को अध्यक्ष पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा रहा था लेकिन वे खुद चुनाव हार गए है। वहीं सपा की तरफ से हवलदार यादव, निवर्तमान अध्यक्ष मीरा यादव, बाहुबली पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव के पुत्र विजय यादव अध्यक्ष पद की दावेदारी कर रहे हैं। वहीं बसपा से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मीरा आजाद अध्यक्ष पद की दावेदारी कर रही है।

सपा का दावा सबसे मजबूत

जिले में अध्यक्ष पद के लिए सपा का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है। कारण कि पिछले दस सालों से लगातार सीट पर मीरा यादव का कब्जा है। वहीं बसपा की मीरा आजाद भी दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। रहा सवाल भाजपा का तो आजमगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष सीट पार्टी के लिए अबुझ पहेली रही है। अब तक सिर्फ एक बार भाजपा उप चुनाव में अपना अध्यक्ष बनाने में सफल हुई हैं नहीं तो हमेशा से इस सीट पर सपा और बसपा का दबदबा रहा है। इस बार बीजेपी में थोड़ी उम्मीद जगी है। कारण कि सपा बसपा का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। वहीं 26 सीटों पर निर्दल जीतने में सफल रहे है। 10 सीट बीजेपी के पास है। सत्ता का लाभ लेकर पार्टी निर्दलियों के साथ जिले की सत्ता हासिल करने की कोशिश करेगी। पूर्व मंत्री कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा की पत्नी को प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

BY Ran vijay singh

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