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लोकसभा चुनाव से पहले यूपी बीजेपी अध्यक्ष को लिखा पत्र लीक, सामने आई बड़ी गुटबाजी, मचा सियासी हड़कंप

पत्र में कई नेताओं पर लगाये गये हैं गंभीर आरोप
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आजमगढ़

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Akhilesh Kumar Tripathi

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Updated: 30 Sep 2018, 4:46 PM IST

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आजमगढ़. साल 1991 के राम लहर में भी इस जिले में कोई करिश्मा न कर पाने वाली बीजेपी गुटबंदी और भीतरघात के मामले में सपा और कांग्रेस से भी आगे निकल गयी है। पिछले दिनों पीएम की रैली के पूर्व सीएम की मीटिंग के दौरान बीजेपी की गुटबंदी खुलकर सामने आयी थी, लेकिन उस समय मामले को दबा दिया गया था, लेकिन अब बीजेपी के विधानसभा चुनाव में मामूली अंतर से हारने वाले प्रत्याशी का प्रदेश अध्यक्ष को लिखा गया पत्र लीक हो गया है।

इस प्रत्याशी ने अपनी हार का कारण वर्तमान जिलाध्यक्ष सहित कुछ नेताओं के भीतरघात को ठहराया है। पत्र लीक होने के बाद यह चर्चा शुरू हो गयी है कि क्या इस गुटबंदी और भीतरघात के बीच पीएम मोदी का मिशन 2019 सफल हो पाएगा। जिन नेताआेंं पर आरोप लगा है उनपर किसी तरह की जांच और कार्रवाई भी नहीं हुई है कारण कि वे प्रदेश अध्यक्ष से लगायत कई बड़े सवर्ण नेताओं के करीबी है। ऐसे में पिछड़ी जाति के नेताओं के विद्रोह का खतरा भी बढ़ गया है।

बता दें कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में अतरौलिया सीट से पंचायत प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक रमाकांत मिश्र, वर्तमान जिलाध्यक्ष जयनाथ सिंह, विपुल सिंह, सुरेंद्र मिश्र, विनोद राजभर सहित दर्जनभर लोगों ने टिकट की दावेदारी की थी। उस समय जयनाथ सिंह को इसलिए टिकट नहीं मिला क्योंकि पार्टी ने उन्हें वर्ष 2012 में सदर से लड़ाया था और वे दस हजार मतों का आंकड़ा भी नहीं छू सके थे। रहा सवाल विपुल का तो वे कभी जिले की राजनीति नहीं किए बल्कि चुनाव से पहले एकाएक अवतरित हो गए थे। बसपा से पार्टी में आए पूर्व विधायक सुरेंद्र मिश्र की छवि जनता के बीच ठीक नहीं थी। वर्तमान में वे शराब के अवैध करोबार में जेल में भी बंद है।

रमाकांत मिश्र का दावा काफी मजबूत था। कारण यह है कि वे क्षेत्र के जुझारू नेताओं में गिने जाते थे। छात्र राजनीति से ही बीजेपी से जुडे़ रहे। शिब्ली नेशनल कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में पहली बार वर्ष 1985-86 में संघ के आनुशंगिक संगठन विद्यार्थी परिषद का खाता खोलते हुए रमाकांत मिश्र उपाध्यक्ष चुने गए। इसके बाद अगले ही चुनाव में वर्ष वर्ष 1987-88 में अध्यक्ष चुने गए। उस समय जयनाथ सिंह कांग्रेस के संगठन एनएसयूपी से चुनाव लड़ा था लेकिन हार का सामना करना पड़ा था।

भीतरघात अथवा विद्रोह न हो इसलिए राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपने करीब और पिछड़ी जाति से आने वाले कन्हैया लाल निषाद को पार्टी का प्रत्याशी बनाया। वहीं सपा से पूर्व मंत्री बलराम यादव के पुत्र डॉ. संग्राम यादव तथा बसपा से अखंड प्रताप सिंह मैदान में उतरे। इसके बाद यहा भीतरधात का खेल शुरू हुआ और बीजेपी मांत्र 2 हजार मतों के अंतर से सीट हार गयी। खुद कन्हैया ने प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि उनकी हार का कारण अपनों का विश्वासघात है।

उन्होंने कहा है कि अतरौलिया विधानसभा प्रभारी शेर बहादुर सिंह, अतरौलिया मंडल प्रभारी आंनंद तिवारी, अहरौला मंडल प्रभारी ओम प्रकाश सिंह, टिकट के दावेदार जयनाथ सिंह, विपुल सिंह, सुरेंद्र मिश्र, विनोद राजभर, प्रमोद सिंह, जयप्रकाश पांडये आदि न केवल खुल कर विरोध किया बल्कि बसपा को लाभ पहुंचाया। विपिन सिंह ने तो बाकायदा फोन कर गाली दी। इतने भीतरघात का परिणाम रहा कि पार्टी चुनाव हार गयी।

अगर चुनाव में पार्टी को 72000 के करीब वोट मिला तो उसमें टिकट के दावेदार रहे प्रभाकर तिवारी, जितेंद्र सिंह, हरिशंकर चौबे, संजय सिंह, रमाकांत मिश्र, पार्टी के नेता आशुतोष चौबे, चंद्रजीत तिवारी, राम सिंह, विवेकानंद, शेरू पांडेय, प्रमोद सिंह बढ़या, हरीश तिवारी, दिलीप गुप्ता, रमाकांत सिंह, प्रमोद सिह उसुर कुढ़वा, विनीत जायवाल आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अगर सारे नेता साथ होते और भीतरघात न होता तो यह सीट पार्टी के पास होती। प्रत्याशी ने विश्वासधात करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।


चूंकि जिन नेताओं पर विश्वासघात का आरोप लगा वे प्रदेश अध्यक्ष, गृहमंत्री और उनके पुत्र पंकज सिंह के खास माने जाते है। पंकज सिंह इस क्षेत्र के प्रभारी है इसलिए पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जिससे पिछड़ी जाति के नेता काफी नाराज दिख रहे है। कारण कि बाद में जिनपर आरोप था वे सभी कहीं न कही बड़े पदों पर बैठा दिये गये। पिछड़ी जाति के लोगों का गुस्सा पीएम की सभा से पहले फूटा था जब सीएम की बैठक में लोगों ने विरोध किया और उन्हें रैली का प्रभारी बदलना पड़ा। अब 2019 के चुनाव में भी इस तरह के भीतरधात की संभावना जतायी जा रही है। कारण कि रमाकांत यादव का चुनाव लड़ना लगभग तय है और वर्तमान संगठन में ज्यादातर लोगों से उनके संबंध अच्छे नहीं है।

BY- RANVIJAY SINGH

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