
दुर्वासा धाम
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. कहते हैं कि तमसा मंजुसा के संगम स्थल दुर्वासा धाम पर स्नान मात्र से सौ पापों से मुक्ति मिल जाती है। यहीं कारण है कि देश के विभिन्न हिस्सों से लोग यहां महर्षि दुर्वासा के दर्शन और स्नान के लिए पहुंचते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां लगने वाले तीन दिवसीय मेंले के दौरान तीन से चार लाख श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाते है। इस स्थान को न तो आज तक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया और ना ही इस नदी की साफ सफाई पर ध्यान दिया गया। अलबत्ता उद्गम स्थल से लेकर विलीन होने के स्थान तक इसमें कचरा बहाया जा रहा है। मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा है और भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों लोग यहां पहुंच गए है लेकिन घाटों की सफाई तक ठीक ढंग से नहीं करायी गयी है। मैली हो चुकी आदि गंगा में लोग डुबकी लगाने को विवश होंगे।
सतयुग से कलयुग तक यहां रहे महर्षि दुवार्सा
दुर्वासा गांव में जिस स्थान पर तमसा मंजुसा का संगम होता है वहीं पर महर्षि दुर्वासा ने तप किया था। मान्यता है कि कलयुग के शुरू होने तक वे यहां थे। कलयुग शुरू हुआ तो वे अंतरध्यान हो गये। आज भी यहां उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित है। वैसे तो यहां प्रतिदिन हजारों लोग दर्शन के लिए पहुंचते है। लेंकिन स्नान पर्व पर यहां लाखों की भीड़ होती है। खासतौर पर कार्तिक पूर्णिमा पर देश के विभिन्न हिस्सों से यहां तीन से चाल लाख लोग स्नान करने के लिए आते है। राम लहर के बाद जब पहली बार भाजपा पूर्ण बहुमत से सत्ता में आयी तो कैबिनेट मंत्री बने कलराज मिश्र ने वादा किया कि इस क्षेत्र के पर्यटन स्थल के रूप् में विकसित करेंगे। उस समय वहां उन्होंने एक पुल और रैन बसेरा का निर्माण कराया। उम्मीद जगी कि शायद अब दिन लौट आये लेकिन फिर वे भी कभी मुड़कर नहीं देखे। यहां तक कि दुवार्सा ऋषि के मंदिर तक जाने के लिए सात साल पहले पहले तक रास्ता नहीं था। लोग चह बनाकर उनका दर्शन करने जाते है। फिर यहां समाजसेवी शकील अहमद ने जन सहयोग से पुल का निर्माण कराया गया। अब लोग आसानी से पहुंच रहे है।
प्रदूषण की हो चुकी है पुष्टि
आदि गंगा के नाम से प्रसिद्ध तमसा नदी की सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण है। वर्ष 2009 में ही शासन ने स्पष्ट कर दिया था कि दर्जन भर औद्योगित इकाइयां इसमें औद्योगित अपशिष्ट बहा रही है। इनके खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गयी थी लेकिन परिणाम शून्य रहा। अक्सर गर्मी में नदी का पानी काला पड़ जाता है और जलीय जीव मरने लगते हैं। फिर भी किसी का ध्यान इसकी तरफ नहीं है।
केंद्र सरकार ने दिया बजट लेकिन काम की गति धीमी
पिछले दिनों कें्रद सरकार द्वारा बजट दिया गया लेकिन विकास की गति काफी धीमी है। यूपी में बीजेपी की सरकार बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि शायद अब इसके दिन लौट आये और कचरा प्रबंधन के साथ ही नदी के उद्धार के लिए कुछ काम हो लेकिन सरकार बने छह साल साल हो चुके हैं लेकिन कोई कवायद शुरू नहीं हुई। शहरी क्षेत्र में जन सहयोग से तमसा को साफ किया जाता है लेकिन दुर्वासा में किसी ने इस तरह का प्रयास भी नहीं किया। इस नदी की उपेक्षा से लोग काफी नाराज है।
शुरू हो चुका है मेला
दुर्वासा धाम पर कार्तिक पूर्णिमा मेला शुरू हो चुका है। तीन दिवसीय मेले का आज पहला दिन है। दुकाने, थियेटर, झूला आदि लग चुके हैं। श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला भी जारी है लेकिन घाटों की सफाई आदि के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गयी है। देव स्थल दो तहसीलों में पड़ने के कारण यहां की उपेक्षा और ज्यादा हो रही है। मंगलवार को गंदगी के अंबार के बीच लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाएंगे।
Published on:
07 Nov 2022 06:59 pm
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