
राम सूरत राजभर
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़.UP Assembly Election 2022 जैसा अंदेशा था वैसा ही हुआ। बाहुबली रमाकांत यादव के सपा के टिकट पर फूलपुर पवई से मैदान में उतरने के बाद बीजेपी ने उनके पुत्र विधायक अरूणकांत यादव का टिकट काट दिया। इतना ही नहीं पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र के टिकट की दावेदारी को दरकिनार करते हुए राम सूरत राजभर को मैदान में उतार दिया है। माना जा रहा है कि पार्टी ने एक तीर से दो शिकार किया है। एक तरफ रमाकांत यादव के सामने एक ऐसा प्रत्याशी उतार दिया है जो पहले भी उन्हें कड़ी चुनौती दे चुका है। दूसरे पार्टी ने फूलपुर पवई में राजभर प्रत्याशी उतारकर आसपास की सीटों पर भी राजभर मतों को साधने की कोशिश की है। आइए जानते हैं कि आखिर राम सूरत राजभर हैं कौन जिसपर पार्टी ने विश्वास जताया है।
बता दें कि राम सूरत राजभर मूलरूप से फूलपुर पवई विधानसभा क्षेत्र के मत्थापुर गांव के रहने वाले हैं। रामसूरत राजभर ने गोरखपुर से स्नातक तक शिक्षा हासिल की और फिर अवध विश्वविद्यालय से एलएलबी किया। एक दौर था जब रामसूरत की गिनती बड़े राजभर नेताओं में होती थी। ओमप्रकाश राजभर द्वारा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के गठन के बाद बीजेपी ने आजमगढ़ में राजभर मतों पर दबदबा कायम रखने के लिए राम सूरत राजभर का खुलकर उपयोग किया था।
12 जनवरी 1964 को जन्मे राम सूरत शिक्षा के दौरान ही आरएसएस संपर्क में आए और जब वर्ष 1980 में बीजेपी का गठन हुआ तो पार्टी में शामिल हो गए। वर्ष 1996 में बीजेपी ने इन्हें पहली बार फूलपुर से चुनाव लड़ने का मौका दिया। उस समय बीजेपी की तरफ से अधिक अधिक हासिल करने वाले प्रत्याशी बने। चुनाव में जीत पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव को मिली लेकिन रामसूरत राजभर 27000 मत हासिल करने में सफल रहे थे। उस चुनाव में रमाकांत यादव ने अपनी पत्नी रंजना को सपा के टिकट पर मैदान में उतारा था। रंजना को 28 हजार मत प्राप्त हुए थे।
वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने आजमगढ़ संसदीय सीट से रामसूरत राजभर को मैदान में उतारा। उस समय पूर्वांचल के कद्दावर नेता व इंदिरा गांधी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे चंद्रजीत यादव इस सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी थे। जबकि सपा ने रमाकांत यादव और बसपा ने अकबर अहमद डंपी को मैदान में उतारा था। बाजी रमाकांत यादव के हाथ लगी थी। रामसूरत चुनाव जरूर हार गए थे लेकिन 1 लाख 72 हजार 878 मत हासिल कर बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर सर्वाधिक वोट हासिल करने का रिकार्ड बनाया था। बीजेपी के तरफ से इनसे अधिक वोट सिर्फ रमाकांत यादव और दिनेश लाल यादव निरहुआ ही हासिल कर पाए है।
बीजेपी ने वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में इन्हें फिर फूलपुर से मैदान में उतारा लेकिन बसपा की लहर में इन्हें हार मिली। इसके बाद रामसूरत राजभर पार्टी में हाशिए पर दिख रहे थे। पार्टी द्वारा इन्हें कोई मौका नहीं दिया गया। वर्ष 2022 के चुनाव में बीजेपी की तरफ से टिकट का प्रबल दावेदार अरूणकांत यादव को माना जा रहा था। क्योंकि वे आजमगढ़ में बीजेपी के एक मात्र विधायक थे। इसके अलावा रामसूरत राजभर, पूर्व मुख्यमंत्री रामनरेश यादव के पुत्र अजय नरेश सहित आधा दर्जन लोगों ने टिकट की दावेदारी की थी। सपा द्वारा रमाकांत यादव को फूलपुर पवई से प्रत्याशी बनाने के बाद बीजेपी ने अरूणकांत का टिकट काटकट रामसूरत को प्रत्याशी बनाया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रामसूरत राजभर बीजेपी की सीट बचा पाते हैं कि नहीं। कारण कि यहां राजभर मतों को साधना इनके लिए बड़ी चुनौती होगी।
Published on:
07 Feb 2022 12:31 pm
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