
कोरोना इफेक्ट: किसानों का चीनी मिल पर है 50 कारोड़ का बकाया, धन के लिए दर-दर भटक रहे लोग
आजमगढ़. यूपी की योगी सरकार किसानों के हित को लेकर लाख दावे करे लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सरकार ने पेराई सत्र 2019-20 में गन्ना तौल के 14 दिन के भीतर किसानों को भुगतान देने का निर्देश दिया था। लेकिन यहां कि किसान सहकारी चीनी मिल सठियांव में अभी किसानों का 50 करोड़ के करीब बकाया है। चीनी मिल 22 जनवरी तक गन्ना बेचे किसानों का ही भुगतान कर सकी है। इसमें भी 550 लाख रूपये शुक्रवार को किसानों के खाते में भेजा गया है। विभाग लॉकडाउन के कारण चीनी न बिकने व विद्युत का भुगतान रूकने का रोना रो रहा है लेकिन किसान बेचारा क्या करे। रबी की फसल में भारी नुकसान उठा चुके किसान भुगतान न होेने के कारण खरीफ की तैयारी नहीं कर पा रहा है। अगर तत्काल भुगतान नहीं होता है तो खरीफ की फसल पिछड़नी तय है। इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा। कारण कि विभाग को भी उम्मीद नहीं है कि वे तत्काल सभी का भुगतान कर पाएंगे।
बता दें कि आजमगढ़ के 83 प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर है। यह अपनी सारी जरूरत कृषि उत्पाद बेचकर ही पूरी करते है। यहीं नहीं एक फसल को बेचते है तो उससे आने वाला धन अगली फसल में लागत के रूप में प्रयोग करते है। इस बार बरसात ओलावृष्टि से रबी की फसल में उत्पाद काफी कम रहा है किसान लागत नहीं निकाल पाए है। वही गन्ना की फसल से किसानों को काफी उम्मीद थी। वे इसे बेचकर होने वाली आमदनी से खेती की प्लानिंग में लगे है।
गन्ना खरीद के 14 दिन में करें भुगतान
पेराई सत्र 2019-20 दि किसान सहकारी चीनी मिल में 48 लाख कुंतल गन्ना पेराई का लक्ष्य रखा गया था जिसके सापेक्ष 45 लाख 11 हजार कुंतल गन्नेे की खरीद चीनी मिल द्वारा की गयी है। हाल में ही पराई सत्र समाप्त हुआ। किसान अपने भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे है। सरकार ने निर्देश दिया था कि गन्ना खरीद के 14 दिन के भीतर किसानों को भुगतान हो जाना चाहिए। इससे लोगों में उम्मीद जगी थी कि पहले की तरह उनका पैसा फंसेगा नहीं लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा। हर बार की तरह इस बार भी चीनी मिल प्रबंधन किसानों का भुगतान करने में असफल रहा है।
अब तक मिल प्रशासन सिर्फ उन किसानों के गन्ने का भुगतान कर पाया है जो 22 जनवरी तक अपना गन्ना मिल को दिये थे। इसमें भी 550 लाख रूपये 24 अप्रैल को किसानों के खाते में भेजा गया है। 22 जनवरी के बाद गन्ना दिये हजारों किसान आज भी भुगतान की बाट जो रहे है। चीनी मिल को किसानों का करीब 50 कारोड़ रूपये भुगतान करना है लेकिन विभाग के पास धन की कोई व्यवस्था नहीं है। किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। किसानों को गन्ने की पेड़ी, गुड़ाई, उर्वरक और धान की नर्सरी की तैयारी भी करने के लिए भी पैसे की जरूरत है। किसान हरिकेश यादव, रामनाथ, तारिक, शहाबुद्दीन, मारकंडेय सिंह, राम नरायन आदि का कहना है कि यदि हमारा भुगतान तत्काल नहीं होता है तो गन्ने की पेड़ी को जो नुकसान होगा वह होगा ही हम धन के आभाव में खरीफ के फसल की तैयारी भी नहीं कर पाएगे। रबी में भारी नुकसान के बाद अब हम खरीफ में भी नुकसान नहीं उठा सकते।
चीनी मिल के जीएम प्रताप नारायण सिंह का कहना है कि लॉकडाउन के कारण पूरे सिस्टम पर असर पड़ा है। चीनी बिक नहीं रही है। हमारे यहां विद्युत उत्पादन होता है उसका करीब 12 करोड़ बकाया है। पावर का पैसा एक दो दिन में आ जाएगा। अन्य श्रोतों से भी व्यवस्था की जा रही है। 12 से 14 करोड़ का भुगतान दो चार दिन हो हो जाएगा। बाकी किसाना को थोड़ी प्रतीक्षा करनी होगी। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द भुगतान हो ताकि किसानों की अगली फसल पर कोई असर न पड़े।
Updated on:
26 Apr 2020 02:52 pm
Published on:
26 Apr 2020 11:57 am
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