
जीत के बाद अपने संसदीय क्षेत्र को भूले मुलायम, आखिर सांसद तक लोग कैसे पहुंचाये अपना दर्द
आजमगढ़. यहां से निर्वाचित सांसद मुलायम सिंह यादव अपने संसदीय क्षेत्र को भूल चुके हैं। सांसद की हैसियत से यहां की आवाम उन्हें खोज रही है। यहां न तो सांसद है और ना ही उनका कोई दूत। लोगों का दर्द उन तक कैसे पहुंचे दूर-दूर तक वह माध्यम दिखाई नहीं देता। मुलायम सिंह ने विधानसभा चुनाव के पहले राम दर्शन यादव को अपना प्रतिनिधि नामित किया, लेकिन वे भी सिर्फ पोस्टर में दिखते हैं। हालत यह है कि, जनता चाहकर भी अपनी बात सांसद तक नहीं पहुंचा पाती। वैसे अब तो सांसद के आने की उम्मीद भी कम ही है कारण कि, उन्होंने मैनपुरी से चुनाव लड़ने की घोषणा कर साफ कर दिया है कि, अब आजमगढ़ से उनका लगाव नहीं रहा लेकिन चुनाव में अभी करीब डेढ़ साल बाकी है ऐसे में जनता अपने दर्द को लेकर जाए कहां।
वैसे बात छोटी हो या बड़ी सपा के लोग नेता जी के संसदीय क्षेत्र की तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र से करने से नहीं चूकते। तरह-तरह के दावे भी किये जा रहे हैं। पर सच सबके सामने है। चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री ने वाराणसी न केवल अपना कार्यालय स्थापित किया बल्कि वे अबतक करीब दस दौरा वाराणसी का कर चुके हैं। चर्चा तो यहां तक होती है कि पीएम वाराणसी के डीए से फोन पर भी बात करते रहते हैं। यहीं नहीं प्रधानमंत्री के गोद लिये गांव में नया प्रधान चुना गया तो पीए ने फोन कर उसे बधाई थी।
वहीं सपा मुखिया का इस जिले में कोई कार्यालय नहीं है। अगर कोई शिकायती पत्र या कोई फरियाद उन तक पहुंचाना चाहे तो सपा जिला कार्यालय का चक्कर काटना पड़ता है। यहां कोई नेता मिलेगा इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। रहा सवाल मुलायम सिंह यादव के गोद लिये गांव तमौली की तो शायद नेताजी को यह भी पता नहीं होगा कि यहां क्या चल रहा है। स्थानीय स्तर पर तमाम समस्यायें हैं जिनका समाधान सांसद स्तर पर हो सकता है। लेकिन वह समस्यायें सांसद तक पहुंचाये कौन और कैसे जब किसी को सांसद का पता ही नहीं मालूम है।
विधानसभा चुनाव के पहले पिछले साल मुद्दे को लेकर कुछ संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। जगह-जगह सांसद की गुमशूदगी के पोस्टर लगाए गए फिर भी कोई असर नहीं हुआ। चुनाव करीब आया तो मुलायम सिंह यादव ने पूर्व विधायक रामदर्शन यादव को अपना प्रतिनिधि बना दिया, लेकिन इन्होंने भी सांसद का कोई कार्यालय नहीं बनाया।
यह भी सिर्फ खास मौके पर चौराहों में लगे पोस्टर में ही दिखते हैं। हालत यह है कि, कोई लाख कोशिश करे सांसद तक अपनी बात नहीं पहुंचा सकता है। इसने मिलना तो दूर की बात है। अब मुलामय सिंह यादव ने लगभग यह साफ कर दिया है कि, वे आजमगढ़ से चुनाव भी नहीं लड़ेगे। ऐसे में यह चर्चा शुरू हो गयी है कि क्या कभी लोग अपने सांसद का दर्शन कर भी सकेंगे या नहीं।
input- रणविजय सिंह
Published on:
16 Jan 2018, 2:45 PM IST
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