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बाहुबली रमाकांत यादव को इस लोकसभा सीट से टिकट मिलना लगभग तय, राष्ट्रीय अध्यक्ष से हुई फाइनल बातचीत!

बीजेपी के पास रमाकांत को छोड़ नहीं है अच्छा विकल्प इसलिए लगभग पक्का है टिकट

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बाहुबली रमाकांत यादव को इस लोकसभा सीट से टिकट मिलना लगभग तय, राष्ट्रीय अध्यक्ष से हुई फाइनल बातचीत!

आजमगढ़. गठबंधन की अकटलों के बीच जिले की सियासत में हर दिन कुछ नया हो रहा है। अब तक चर्चा थी कि भाजपा के बाहुबली पूर्व सांसद रमाकांत यादव फिर सपा में वापसी करेंगे। इसके लिए बैठकों का दौर भी चला लेकिन अंदरखाने की खबरों पर विश्वास करें तो रमाकंत ने सपा में अपना विरोध देख पार्टी में जाने का फैसला बदल दिया है और अब वह भाजपा के टिकट पर ही चुनाव लड़ेंगे। अमित शाह से हाल में हुई वार्ता के बाद भाजपा से इनका टिकट पक्का माना जा रहा है। कारण कि बीजेपी के पास रमाकांत के बाद कोई बेहतर विकल्प भी नहीं है जो गठबंधन की स्थित सपा-बसपा को सीधी चुनौती दे सके।

बता दें कि पिछले दो साल से रमाकांत यादव बीजेपी को लगातार बागी चेहरा दिखा रहे थे। वर्ष 2016 में उन्हेंने गृहमंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ बाकायदा प्रेस कांफेंस की थी और आरोप लगाया था कि राजनाथ सिंह ने वर्ष 2014 के चुनाव में मुलायम के साथ मिलकर मोदी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने की साजिश रची थी।
बात यहीं समाप्त नहीं होती है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में रमाकांत के भाई की बहु अचर्ना यादव को दीदारगंज से टिकट नहीं मिला तब भी उन्होंने बागी रूख अख्तियार कर लिया था और मीडिया के सामने कहा था कि वे निर्दल प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे। अगर उनके प्रत्याशी को भाजपा प्रत्याशी से कम वोट मिला था लोकसभा का टिकट नहीं मांगेंगे। बल्कि पार्टी के लिए वर्कर के रूप काम करेंगे।

चुनाव बाद यूपी में बीजेपी की सरकार बनी तो रमाकांत यादव ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेस कर सीएम योगी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और आरोप लगाया कि सीएम और सरकार अति पिछड़ों को कीड़ा मकोड़ा समझ रही है। जिले के सियासी गर्मी तब बढ़ गयी जब रमाकांत यादव ने सपा महाराष्ट्र प्रांत के अध्यक्ष अबु आसिम के साथ मीटिंग की और उनके सपा में वापसी का चर्चा शुरू हो गयी।

वापसी को लेकर बाद में रमाकांत यादव पूर्व सीएम अखिलेश यादव व प्रोफेसर राम गोपाल से भी मिले। माना जा रहा था कि जुलाई में उनकी वापसी सपा में हो जाएगी लेकिन सपा में उनकी वापसी का राष्ट्रीय महासचिव बलराम यादव सहित कई बड़े नेताओं ने विरोध शुरू कर दिया। इसी बीच पीएम मोदी की आजमगढ़ में रैली हुई। रमाकांत यादव रैली से दूरी बनाये रहे लेकिन अंतिम समय में उनकी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से बात हुई और वे रैली में पहुंच गए।

सूत्रों की माने तो बीजेपी शीर्ष नेतृत्व भी मान रहा है कि आजमगढ़ में रमाकांत का विकल्प उनके पास नहीं है। गठबंधन की स्थित में पार्टी के लिए मजबूत प्रत्याशी उतारना मुश्किल होगा। यही वजह है कि पार्टी ने रमाकांत की हिमाकतों को भुला दिया है और एक सप्ताह में अध्यक्ष और पूर्व सांसद के बीच कई बार वार्ता हुई। इसके बाद रमाकांत को यह आश्वासन दे दिया गया है कि उनका टिकट पक्का है। अब रमाकांत भी बीजेपी पर कोई टिप्पणी करने से कतरा रहे हैं। कई स्थानों पर उन्हें यह कहते हुए जरूर सुना गया कि बड़े भाई बलराम ने विरोध कर दिया तो क्या करें। इससे साफ है कि अब रमाकांत की वापसी सपा में नहीं होगी बल्कि वे भगवा बिग्रेड के टिकट पर ही चुनाव लड़ेगे।