
अखिलेश यादव मायावती और नरेन्द्र मोदी
आजमगढ़. यूपी में एनडीए और गठबंधन के बीच चल रहे शह मात के खेल में हर दिन नई रणनीति बनती और बिगड़ती दिख रही है। बीजेपी जहां सवर्ण, वैश्य और अति पिछड़ों के दम पर मिशन-2019 को फतह करना चाहती है वहीं सपा बसपा गठबंधन भाजपा के वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा है। सपा यादव, मुश्लिम तो बसपा दलित और मुस्लिम को अपना वोट बैंक मानकर चल रही है। इनका पूरा फोकश अति पिछड़ों को अपने पक्ष में करने पर है। इसके लिए गठबंधन ने प्लान तैयार कर अमल करना शुरू कर दिया है।
बता दें कि यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 73 एनडीए के पास है। मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले अंतरिम बजट में किसान और मध्यम वर्ग और मजदूरों को बड़ी राहत देकर चुनावी दाव खेल दिया है। बजट से आम आदमी राहत महसूस कर रहा है। यदि सरकार चुनाव से पहले किसानों के खाते में पहली किश्त 2000 रूपये भेजने में सफल होती है तो निश्चित तौर पर इसका फायदा उसे मिलेगा। इस बात से सपा बसपा गठबंधन भी वाकिफ है। वहीं गठबंधन को शिवपाल से भी नुकसान पहुंचने का खतरा है। इसलिए गठबंधन तैयारी को कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता है।
अब सपा बसपा के लोग नई रणनीति के साथ मैदान में उतर रहे हैं। दोनों पार्टियों के नेतृत्व ने यह तय किया है कि अलग-अलग मैदान में उतरने के बजाय वे साथ उतरेंगे। इस योजना के तहत दोनों टीमों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलाकर टीम का गठन किया जायेगा। यह टीमें उन क्षेत्रों में जाएंगी जहां अति पिछड़ों की संख्या अधिक है। गठबंधन के नेता अति पिछड़ों को 15 लाख खेते में भेजने, बेरोजगारी, अपराध, विकास जैसे मुद्दे पर सरकार को घेरेंगे और उन्हें अपने पक्ष में करने का प्रयास करेंगे। सपा के जिलाध्यक्ष इस संबंध में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश भी जारी कर चुके हैं। अगर गठबंधन अति पिछड़ों को कुछ प्रतिशत भी अपने पक्ष में करने में सफल होता है तो बीजेपी की मुश्किल बढ़नी तय मानी जा रही है।
By Ran Vijay
Published on:
03 Feb 2019 02:33 pm
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