
लाल बिहारी यादव
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. भारतीय जनता पार्टी का मजबूत किला कहे जाने वाले काशी क्षेत्र में आजमगढ़ के लाल बिहारी यादव ने शिक्षक एमएलसी चुनाव जीत पीएम नरेंद्र मोदी का तिलिस्म तोड़ दिया है। लालबिहारी की जीत सेे समाजवादी पार्टी को पूर्वांचल में नई ऊर्जा मिली है। इसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है।
बता दें कि मूल रूप से वाराणसी भाजपा का गढ़ माना जाता है। जब बीजेपी यूपी की सत्ता में नहीं थी तब भी यहां पार्टी का दबदबा रहा है। वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां के सांसद है। पीएम मोदी के प्रति यहां के लोगों ने जो विश्वास दिखाया उससे यह माना जा रहा था कि शिक्षक एमलसी चुनाव में बीजेपी की जीत पक्की होगी। यहां की जीत से बीजेपी एक बार फिर पूर्वांचल में बड़ा मैसेज देने में सफल होगी जिसका फायदा उसे वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में मिलेगा।
हाल में हुए विधानसभा उपचुनाव में बड़ी जीत से जहां भाजपाई उत्सा से लवरेज थे वहीं हार से सपाइयों का आत्मविश्वास डगमगाया था। एक और हार इनकी मुश्किल और बढ़ाने वाली थी लेकिन समाजवादी पार्टी ने शिक्षक राजनीति के मझे हुए खिलाई आजमगढ़ जिले के खरिहानी गांव निवासी लालबिहार यादव पर दाव लगा बीजेपी के सारे दाव उल्टे कर दिये। लालबिहारी ने जीत हासिल कर काशी क्षेत्र में न केवल भाजपा का तिलिस्म तोड़ा है बल्कि सपाइयों को मुस्कुराने का अवसर प्रदान कर दिया है। सपाई जीत से गदगद नजर आ रहे है। सपा सरकार में राज्यमंत्री रहे रामदुलार राजभर, पूर्व कैबिनेट मंत्री रामआसरे विश्वकर्मा ने इसे समाजवादी की जीत बताई है। उन्होंने कहा कि जनता ने सरकार को संदेश दे दिया है कि वह उनकी नीतियों से खुश नहीं है। आने वाले विधानसभा चुनाव में सपा बड़ी जीत हासिल कर यूपी में सरकार बनायेगी।
BY Ran vijay singh
Published on:
05 Dec 2020 11:51 am
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