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बड़वानी जिला अस्पताल में बनेगा आई बैंक

अस्पताल में आई बैंक खोलने की कवायद, इंदौर मेडिकल कॉलेज की टीम ने किया दौरा, सुरक्षित रखें जा सकेंगे कोर्निया, नेत्रदान को मिलेगा बढ़ावा

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Manish Arora

Jul 04, 2017

Barwani district hospital

Barwani district hospital

बड़वानी. जिला अस्पताल बड़वानी में आई बैंक खोलने की कवायद शुरू हो गई है। उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक बड़वानी जिला अस्पताल में आई बैंक खुल जाएगा। पिछले माह इंदौर मेडिकल कॉलेज के दो सदस्यीय दल ने बड़वानी जिला अस्पताल का दौरा कर यहां आई बैंक खोलने की संभावनाओं को टटोला। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक टीम की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आई बैंक को रजिस्ट्रेशन के लिए पत्र लिखा है। आई बैंक से जल्द रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। बड़वानी जिले में फिलहाल चार आई टैक्नीशियन हैं, जो इंदौर आई बैंक से डेढ़ माह का प्रशिक्षण भी ले चुके हैं। ट्रेनिंग के दौरान इन्हें आंख से कार्निया निकालना और ट्रांसप्लांट करना सिखाया गया।


42 घंटों तक रहेगा कोर्निया सुरक्षित
आई बैंक बनने से नेत्रदान के प्रति जागरुकता बढ़ेगी। आम तौर पर कोर्निया खराब होने की वजह से लोगों दृष्टिहीनता के शिकार हो जाते हैं। आई बैंक बनने के बाद कोर्निया सुरक्षित रखा जा सकेगा और जरूरतमंद लोगों को ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा। आई बैंक में 42 घंटे तक कोर्निया सुरक्षित रखा जा सकता है।


नेत्रदान को मिलेगा बढ़ावा
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक 2014 से लेकर अब तक जिले में 30 से ज्यादा नेत्रदान हो चुके हैं। आई बैंक बनने के बाद नेत्रदान करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।


नेत्रदान के लिए उम्र की सीमा नहीं
किसी भी उम्र में नेत्रदान किया जा सकता है। दानदाता की मृत्यु हो जाने के बाद संबंधित अस्पताल में इसकी सूचना देना होती है। निर्धारित समय पर नेत्र चिकित्सक नेत्रों को सुरक्षित स्थान पर रखते हैं। नेत्रदान के लिए पूर्व में इसकी घोषणा जरूरी नहीं है। परिजनों की सहमति से मृत्यु के छह घंटे के भीतर नेत्रदान किया जा सकता है।


आई बैंक से बढ़ेगा उजियारा
बड़वानी जिले में नेत्रदान जागरुकता के लिए काफी समय से काम कर रहे अजित जैन ने बताया कि क्षेत्र में नेत्रदान के प्रति पिछले कुछ समय से जागरुकता आई है। यदि आई बैंक खुलता है, तो नेत्रदान करने वालों की संख्या बढ़ेगी। जरूरी संसाधन नहीं होने की वजह से कई बार चाहते हुए भी लोग नेत्रदान नहीं कर पाते हैं।


मानक पूरा करने में जुटा अस्पताल प्रशासन
इंदौर मेडिकल कॉलेज से टीम आई थी। निरीक्षण के दौरान कुछ कमियां पाई गई थी। आई बैंक के लिए जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर और अन्य सुविधाओं के आधार पर टीम की ओर से कुछ सुझाव भी दिए गए थे। मानकों को पूरा करने के लिए सिविल सर्जन को निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ. रजनी डावर, सीएमएचओ

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