भारतीय किसान संघ ने अपने ज्ञापन में बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम किसानों के साथ धोखा है। इसे प्रसंस्करण व प्रोसेसिंग करने वालों पर दंड लगाया जाए। नकली घी, दूध, मावा, तेल बाजार में इतने हंै कि जिससे किसानों की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है। पशु आहार पर 4 प्रतिशत मिट्टी की छूट अघुलनशील तत्व के रुप में खाद्य तेल में 10 प्रतिशत मिलावट की छूट, जबकि किसानों के गेहूं पर फेक-2 प्रतिशत मिट्टी की छूट है, तो फिर मंडी में किसानों की उपज का निर्बाध विक्रय होना चाहिए। प्रत्येक विकासखंड स्तर पर एक लेबोरेटरी हो जहां किसानों द्वारा खरीदे गए खाद, बीज, दवाई एवं मिट्टी परीक्षण करवा सकें। राष्टï्रीयकृत बैंकों में कृषि बीमा तो है लेकिन प्रायवेट जीवन बीमा कंपनी और बैंक अधिकारी की मिलीभगत से किसानों के केसीसी पर दबाव डालकर कमीशन के लालच में किसानों का बीमा किया जा रहा है। जिसे किसान एक दो किश्तों तक ही चला पाता है। 70 प्रतिशत किसानों के हजारों करोड़ रुपया प्रायवेट बीमा कंपनी के खातों में चला जाता है। इसकी जांच करवा कर दोषी अधिकारी एवं बीमा कंपनियों पर कार्रवाई कर किसानों के रुपए वापस करवाए जाएं। इन्होंने यहां बताया कि मप्र में पैदा होने वाले प्रत्येक कृषि उत्पाद की दुनिया के देशों में बहुत मांग है, विशेष कर मालवा, निमाड़ क्षेत्र की उपज उन्नत एवं गुणवत्ता होने के कारण प्रत्येक जिलों पर निर्यात हब बनाए जाए। साथ ही जैविक हाट बनाए जाएं। इसी प्रकार इस क्षेत्र में जैविक कृषि उत्पादन भी अधिक होता है, क्षेत्र में जैविक उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए भी जैविक हब बनाएं और पशु पालन में आर्थिक सहयोग करके देशी नस्ल के पशु धन के दूध, दही, घी को प्रोत्साहन देकर पशु पालन नीति को स्पष्टï पारदर्शी, किसान हितैषी बनाई जाएं।