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नाराज किसानों ने बैल को ज्ञापन देकर सुनार्इं समस्याएं

 कलेक्टर के नहीं आने से गुस्साएं किसानों ने बैल को दिया ज्ञापन कलेक्टर गेट पर हुआ खास हंगामा, अधिकारियों की एक न सुनी मंडी में सभा के बाद बाइक रैली के रूप में पहुंचे थे किसान

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Editorial Khandwa

Sep 24, 2016

Angry farmers Bull by the memorandum Told Problems

Angry farmers Bull by the memorandum Told Problems..

बड़वानी.खंडवा मध्यप्रदेश.
अपनी समस्याओं के निराकरण की मांग लेकर शुक्रवार जब किसान कलेक्टोरेट पहुंचे तो यहां खासा हंगामा हुआ। यहां जब ज्ञापन देने की बात आई तो किसान कलेक्टर को ज्ञापन देने की बात पर अड़ गए। किसानों ने यहां तहसीलदार, अपर कलेक्टर व एसडीएम तीनों अधिकारियों को ज्ञापन देने से मना कर दिया। यहां पर किसान कलेक्टर को बाहर बुलाने की बात पर अड़ गए। जब कलेक्टर नहीं आए तो किसानों को गुस्सा खासा भड़क गया। इसके बाद किसानों ने यहां दो बैल लाकर बैलों को ज्ञापन दिया। किसानों ने बताया कि कलेक्टर यहां ज्ञापन लेने तक नहीं आ रहे हैं तो हमारी समस्या का क्या समाधान करेंगे। इसके पूर्व किसान संघ पदाधिकारियों ने राजघाट रोड स्थित मंडी में सभा की। इसके बाद यहां उरी में हुए आतंकी हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। यहां से श्रद्धांजलि देकर सभी किसान बाइक रैली के रुप में शहर से होते हुए कलेक्टोरेट पहुंचे। यहां पर किसानों को कलेक्टोरेट गेट पर ही रोक दिया। इसके बाद यहां किसान काफी देर तक यहां डटे रहे। किसान यहां कलेक्टर तेजस्वी एस नायक से उनकी समस्याओं व मांगों के संबंध में विस्तृत चर्चा करना चाहते थे। कलेक्टर के नाम तैयार ज्ञापन में संघ ने पीएम बीमा योजना के तहत हुए बीमा राशि दिलाई जाने की मांग, जिले को सुखाग्रस्त घोषित किए जाने, ऋण माफी, नुकसानी का मुआवजा, लोअर गोई संबंधी मांगों सहित अन्य मांगे शामिल थी।

खाद्य सुरक्ष अधिनियम किसानों के साथ धोखा

भारतीय किसान संघ ने अपने ज्ञापन में बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम किसानों के साथ धोखा है। इसे प्रसंस्करण व प्रोसेसिंग करने वालों पर दंड लगाया जाए। नकली घी, दूध, मावा, तेल बाजार में इतने हंै कि जिससे किसानों की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है। पशु आहार पर 4 प्रतिशत मिट्टी की छूट अघुलनशील तत्व के रुप में खाद्य तेल में 10 प्रतिशत मिलावट की छूट, जबकि किसानों के गेहूं पर फेक-2 प्रतिशत मिट्टी की छूट है, तो फिर मंडी में किसानों की उपज का निर्बाध विक्रय होना चाहिए। प्रत्येक विकासखंड स्तर पर एक लेबोरेटरी हो जहां किसानों द्वारा खरीदे गए खाद, बीज, दवाई एवं मिट्टी परीक्षण करवा सकें। राष्टï्रीयकृत बैंकों में कृषि बीमा तो है लेकिन प्रायवेट जीवन बीमा कंपनी और बैंक अधिकारी की मिलीभगत से किसानों के केसीसी पर दबाव डालकर कमीशन के लालच में किसानों का बीमा किया जा रहा है। जिसे किसान एक दो किश्तों तक ही चला पाता है। 70 प्रतिशत किसानों के हजारों करोड़ रुपया प्रायवेट बीमा कंपनी के खातों में चला जाता है। इसकी जांच करवा कर दोषी अधिकारी एवं बीमा कंपनियों पर कार्रवाई कर किसानों के रुपए वापस करवाए जाएं। इन्होंने यहां बताया कि मप्र में पैदा होने वाले प्रत्येक कृषि उत्पाद की दुनिया के देशों में बहुत मांग है, विशेष कर मालवा, निमाड़ क्षेत्र की उपज उन्नत एवं गुणवत्ता होने के कारण प्रत्येक जिलों पर निर्यात हब बनाए जाए। साथ ही जैविक हाट बनाए जाएं। इसी प्रकार इस क्षेत्र में जैविक कृषि उत्पादन भी अधिक होता है, क्षेत्र में जैविक उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए भी जैविक हब बनाएं और पशु पालन में आर्थिक सहयोग करके देशी नस्ल के पशु धन के दूध, दही, घी को प्रोत्साहन देकर पशु पालन नीति को स्पष्टï पारदर्शी, किसान हितैषी बनाई जाएं।

भाकिसं की पीएम से मांगे

- वर्तमान में किसानों की फसलों का मूल्य लागत की अनुपात में बहुत कम है, उसे 198 2 की जनगणना मूल्य सुचकांक के आधार पर खेती में लगने वाले सारे उपकरण संसाधन, डीजल, बिजली, खाद दवाई, मजदूरी और तनाव आवश्यकता शिक्षा, उपचार, मकान, कपड़ा पर 200 प्रतिशत से 500 प्रतिशत तक भाव बढ़े है। उस अनुपात में फसलों के भाव न्यूनतम हैं। उसे लागत से अनुपातिक जोड़कर 30 प्रतिशत लाभकारी मूल्य खरीदी के साथ घोषित करें एवं फसल पूर्वानुमान सेटेलाइट आधारित हो।

-भूमि अधिग्रहण अधिनियम में संशोधन किया जाए। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग में सुधार हो, होरिजेंटल विकास स्थान पर वर्टिकल विकास हो।

- खेती योग्य भूमि का अधिग्रहण न हो, बंजर उबड़-खाबड़, पड़ती जमीन का ही अधिग्रहण हो।

- पूर्व में जो भूमि ऐसे उद्योगों के लिए अधिग्रहण की गई, जहां उद्योग लगे ही नहीं, वह भूमि कृषकों को वापस की जाए।

-सभी प्रकार की औषधीय, मसाला, फल-फुल, दूध, सब्जी का गांव में उत्पादन अनुसार किसान समूह द्वारा उत्पादन प्रसंस्करण, पैकिंग की ट्रेनिक देकर मशीने लगवाकर बेचने के नियमों में सरलता लाई जाए।

-कृषि प्रधान देश में केंद्र सरकार द्वारा कृषि बजट अलग से पेश करें।

-महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को कृषि कार्यों से जोड़ा जाए।

-किसान कोष में प्रत्येक प्रदेश का राहत कोष तय हो तथा जरुरत पडऩे पर प्राकृतिक आपदाओं में तुरंत आवश्यकतानुसार जारी हो।

-किसानों एवं शासकीय सेवाओं के समस्त कार्य लोक सेवा गारंटी में समय-सीमा में लाए जाएं।

-मप्र के गेहूं और डालर चने के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाएं।

-दूध के भाव कर्मचारियों के डीए के अनुरुप बढ़ाए जाएं।

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