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अब शिकारियों को भी पकड़ेगी MP पुलिस, जंगल में उतरेगी टीम, चलेगा ऑपरेशन

MP News: मध्यप्रदेश में वन्यजीव शिकार पर अब निर्णायक वार की तैयारी है। बाघ, तेंदुए और मोर के बढ़ते शिकार ने सरकार और सिस्टम को झकझोर दिया है। पुलिस-वन विभाग की साझा रणनीति से शिकारी सीधे रडार पर आ गए हैं।

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भोपाल

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Akash Dewani

Jan 22, 2026

mp news police forest department joint action against wildlife poaching

mp police joint action against wildlife poaching (फोटो- AI)

MP News: अब प्रदेश की पुलिस (MP Police) भी बाघ, तेंदुए और मोर के शिकारियों को पकड़ने में वन विभाग की मदद करेगी। यही नहीं, पुलिस द्वारा की जाने वाली क्राइम समीक्षा में वन्यप्राणियों व पक्षियों के शिकार करने को लेकर दर्ज मामलों की भी समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा वन विभाग मप्र में विभिन्न तरह के अपराधों की पड़ताल करने वाली अन्य एजेंसियों की भी मदद लेंगे।

यह समिति मप्र स्टेट टाइगर सेल (MP State Tiger Cell) की 8वीं बैठक में बनी है। पत्रिका ने हाल में बताया कि बीते 52 सालों में 229 बाघ, 560 तेंदुए और 545 मोर समेत बड़ी संख्या में दूसरे वन्यप्राणियों का शिकार हुआ। ज्यादातर शिकार अवैध व्यापार के मकसद से किए जा रहे हैं तो कुछ की जान अंधविश्वास में ली जा रही है।

विशेषज्ञ व अफसरों ने भी जताई चिंता

विशेष पुलिस महानिदेशक एसटीएफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में बाघ, तेंदुआ, हाथी और अन्य वन्य जीवों पर मंडराते खतरे को चिंताजनक माना। वन्यप्राणियों की मौत पर विस्तार से चर्चा हुई। जिसमें सबसे प्रमुख कारण शिकार सामने आया तो सड़क दुर्घटना, रेल दुर्घटना, बिजली करंट से होने वाली मौतों पर भी बातचीत की। इन्हें रोकने के लिए ठोस कदम उठाने को लेकर सहमति बनी। अपराधियों द्वारा शिकार के लिए अपनाए जा रहे तरीकों पर भी चर्चा की।

शिकार रोकने और शिकारियों को पकड़ने ये मददगार

कानून प्रवर्तन संस्थाओं जैसे वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, संचालनालय लोक अभियोजन, रेलवे सुरक्षा बल, शासकीय रेल पुलिस, सायबर पुलिस, डीआरआइ, सीबीआइ, कस्टम, इंटेलिजेंस ब्यूरो, वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एवं हेल्थ, एनएफएसयू, एनटीसीए, स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भोपाल एवं सागर, परिवर्तन निदेशालय मप्र विद्युत वितरण कंपनी, टाइगर रिजर्व और मप्र स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स के अफसर-प्रतिनिधि शिकार रोकने और शिकारियों को पकड़ने में मदद करेंगे।

इन बिंदुओं पर सहमति

  • खुफिया तंत्र सुदृढ़ीकरण एवं वाइल्ड लाइफ क्राइम हॉट-स्पॉट की जानकारी वन विभाग पुलिस को देगा।
  • वन अपराध में लिप्त आरोपियों के विरुद्ध आर्म्स व आइटी एक्ट, बीएएनएस के तहत कार्रवाई होगी।
  • फरार वारंटी की गिरफ्तारी में पुलिस भी सहयोग करेगी।
  • वन्य जीव से जुड़े मामलों पर डिजिटल निगरानी, कार्रवाई एवं टाइगर रिजर्व में पर्यटन के लिए ऑनलाइन बुकिंग संबंधी फ्रॉड की रोकथाम के प्रयास सामूहिक होंगे।
  • रेलवे सुरक्षा बल व जीआरपी के साथ वन विभाग के स्वान दस्ता की संयुक्त गश्ती होगी।
  • न्यायालय में लंबित प्रकरणों की समीक्षा एवं त्वरित निराकरण के लिए संचालक अभियोजन संचालनालय द्वारा सुझाव दिए जाएंगे, सहयोग भी किया जाएगा।
  • वन अपराधों की छानबीन नए तरीकों से करने, आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने एक सेल को प्रभावी बनाया जाएगा। इसमें राजस्व विभाग भी शामिल होगा। (MP News)
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