बड़वानी

बड़े भाई की जिंदगी बचाने अपनी किडनी दे रहीं छोटी बहन

भाई को किडनी देकर नई जिंदगी देंगी बहन, परिवार के लोगों में बनी सहमति, इंदौर के निजी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए आज होगा ऑपरेशन

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Mar 18, 2023
भाई को किडनी देकर नई जिंदगी देंगी बहन

अंजड़. भाई बहन का स्नेह का बंधन होता ही कुछ ऐसा है। जब भी बहन या भाई पर कोई मुसीबत आती है, दोनों एक-दूसरे का साथ देने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। भाई बहन के प्रेम का एक ऐसा ही मामला बड़वानी जिले के अंजड़ से सामने आया है। यहां अपने भाई की जिंदगी बचाने एक बहन ने अपना ही जीवन दांव पर लगा दिया है।

सांसारिक रिश्तों में बहन-भाई का रिश्ता अनमोल और अटूट होता है। बचपन में दोनों का एक-दूसरे से लड़ना, रूठना, लाड़ जताना तो चलता ही रहता है, लेकिन समय के साथ यह रिश्ता और ज्यादा प्रगाढ़ हो जाता है। दोनों एक दूसरे के लिए हर विपरीत परिस्थिति से लड़ने के लिए तैयार रहते हैं। अंजड़ में भी एक भाई—बहन विपरीत परिस्थियों से साथ मिलकर लड़ रहे हैं।

यहां 54 वर्षीय बाबूलाल परमार वर्ष 2011 से किडनी की बीमारी से ग्रस्त हैं। उन्हें किडनी की जरूरत है लेकिन उनकी पत्नी ललिता बाई का ब्लड ग्रुप अलग होने से वे किडनी दान करने में असमर्थ थीं। ऐसे में उनकी 51 वर्षीय बहन शांति बर्फा आगे आईं और उन्होंने अपने भाई के लिए किडनी देने की इच्छा जताई। बहन से किडनी के रूप में एक नए जीवन का उपहार पाकर अब बाबूलाल परमार करीब 12 साल बाद डायलिसिस से मुक्त होंगे। 18 मार्च शनिवार को इंदौर के निजी अस्पताल में यह किडनी ट्रांसप्लांट हो रहा है।

बालकुआं में रह रहे बाबूलाल परमार खेती किसानी का काम करते हैं। पत्नी का ब्लड ग्रुप अलग होने से जब वे किडनी दान करने में असमर्थ हो गईं तो ये जिम्मा उनकी बहन शांति बर्फा ने उठा लिया। बहन अपने पति भारत बर्फा के साथ अंजड़ में रहती हैं। बाबूलाल परमार कहते हैं कि उन्हें खुशी है कि उनकी छोटी बहन फिर से एक नई जिंदगी दे रही हैं।

शांति बर्फा के पति भारत बर्फा ने बताया कि जब मुझसे पत्नी ने पूछा कि क्या मैं अपने भाई को एक किडनी दे सकती हूं, तो पहले परिवार के लोग कुछ संकोच में पड़ गए। बाद में हमारे बेटे रजत बर्फा व उपेंद्र बर्फा ने कहा तो सबने सहमति जता दी। मुझे खुशी है कि मेरी पत्नी अपने भाई कोे नया जीवन दे रही है।

Published on:
18 Mar 2023 01:29 pm
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