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पत्रिका एक्सक्लूसिव: महिला ने शूटिंग में गोल्ड पर साधा निशाना, तो पुरुष खिलाड़ी बोला यह मेरे लिए शर्म की बात

32 बोर की पिस्टल, 25 मीटर की दूरी और लगाया गोल्ड पर निशाना

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महिला ने शूटिंग में गोल्ड पर साधा निशाना, तो पुरुष खिलाड़ी बोला यह मरे लिए शर्म की बात

सचिन त्यागी/बागपत. फिल्म सांड की आंख की मुख्य कैरेक्टर शूटर दादी की रीयल कहानी बहुत ही रोचक है। सूटर दादी प्रकाशों तोमर ने पत्रिका से विशेष बातचीत की और अपने अनुभव साझा किये। उनका जीवन बहुत ही सघर्ष पूर्ण रहा है। वह बताती है कि जब वे अपनी पोती रूबी तोमर, सोनिया तोमर और प्रीति तोमर को सूटिंग सिखाने के लिए निकली तो कभी सोचा भी नहीं था कि वे खुद इतनी बड़ी शूटर बन जाएंगी। वे बताती है कि वह गांव में ही फरूक पठान के पास अपनी पोतियों को सुटिंग सिखाने के लिए ले गई तो परिवार वालों ने कहा था कि ये बच्चीयां अकेले कही नहीं जाएंगी तो उन्होंने बच्चों को अपने साथ लेकर जाने के लिए कहा और सुटिंग रेज पहुंची। दस दिन तक शूटिंग देखने के बाद कोच फारूक पठान ने जब उनको भी निशाना लगाने के लिए कहा तो पहले दादी थोड़ा सहम गई, लेकिन जब निशाना लगाया तो कोच पठान के होश उड़ गये। इसके बाद उन्होंने दादी प्रकाशों तोमर को भी सुटिंग के लिए प्रेरित किया।

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जब आया गोल्ड हो गई सबकी बोलती बंद
प्रकाशो दादी बताती है कि जब वह सुटिंग सीखने के लिए निकलती थी तो उनको देखकर लोग उपहास करते थे। कहते थे कि ये जाएंगी बोर्डर पर। ये लड़ेंगी जंग। ऐसे न जाने कितने ही तंज उनको सुनने को मिलते थे। सास-ससुर भी उनको ताने मारते थे, लेकिन उन्होंने अपनी बच्चियों को साथ लेकर सुटिंग सिखने जाना नहीं छोड़ा। एक साल बाद दिल्ली के तुग्लकाबाद में एक प्रतियोगिता के दौरान उनकी परीक्षा हुई। इस प्रतियोगिता में डीआईजी धीरज सिंह भी आए हुए थे, जो मंझे हुए खिलाड़ी थे और निशाने बाज भी। उनका नंबर जब आया तो उनको 32 बोर की पिस्टल दे दी गयी, जो उन्होंने कभी नहीं चलाई थी। यह पिस्टल ज्यादा झटका देती है, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने निशाना लगाया और प्रथम स्थान पाकर गोल्ड भी जीता। प्रतियोगिता में दुसरे नंबर पर रहे डीआईजी को एक महिला से हारना बहुत बुरा लगा और उन्होंने कहा था कि मैं एक महिला से हार गया। यह मेरे लिए बड़े ही शर्म की बात है। उन्होंने मेरे साथ फोटो खिंचाना से भी मना कर दिया लेकिन कुछ लोगों के कहने सुनने के बाद एक फोटो खिंची जो आज भी उनके पास है।

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गोल्ड से हो गयी सबकी बोलती बंद
दादी प्रकाशो कहती है कि जब उनको पहला गोल्ड मिला तो सबसे पहले गांव में उनकी चर्चा हुई और लोगों ने कहा कि इसने कर दिखाया और बच्चों को मेरी मिशाल देने लगे। सास-ससुर को भी मैंने समझाया कि जो गोल्ड जीतकर वो आयी है। उसमें सोना होता है तो उसके सास-ससूर को भी सब अच्छा लगने लगा। इसके बाद उसके सास ससुर ने कभी उनकी आजादी और सुटिंग को लेकर कुछ नहीं कहा। इतना ही नहीं, जो लोग उन पर तंज कशा करते थे, उनकी भी बोलती बंद हो गयी। लोग अपनी औरतों को कहते थे कि तुम्हें कौन जानता है दादी को दुनियां जानती है।

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शूटिंग देखकर है खुश
दादी कहती है कि आज उनकी कामयाबी के चर्चे विदेशों तक में हो रही है, जिसको लेकर एक फिल्म बनायी जा रही है। सांड की आंख । इसको लेकर वह काफी खुश हैं। वो आज उन दिनों को भी याद करती हैं, जब उनको इस कामयाबी पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था। इस फिल्म में उनके संघर्ष की कहानी दिखाई जाएगी, जिसमें उनका किरदार अभिनेत्री तापसी पन्नू और दादी चंद्रो का किरदार भूमि पेडनेकर निभा रही हैं।

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जीवन में कठिनाई को पार करके मिलता है सुख
उन्होंने बताया क आज मुझे बहुत खुशी है कि हमने बहुत संघर्ष किया है। आज मेरी पोती एक इंस्पेक्टर बन गयी हैं। मेरी बेटी आर्मी में है। उन्होंने कहा कि मुझे लड़कियों पर बहुत गर्व है। यही चाहती हुं कि मैं आसपास की सब लड़कियां खेलें, लड़कियां लड़कों से कम नहीं है। लड़की सब कुछ कर सकती है। दुख झेलकर ही सुख आता है।

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मेरी तरह बोलती, चलती और लंबी है तापसी
दादी प्रकाशो ने फिल्ड सांड की आंख में उनका किरदार निभा रही तापसी पन्नू को लेकर काफी उत्साहित है। उनका कहना है कि तापसी उनकी तरह ही बोलती है। उनकी तरह के कपड़े पहनकर चलती भी है और तापसी की लंबाई भी उनकी जितनी ही है। उनको अच्छा लगता है। तापसी को देखकर उसके साथ बात करती हुं तो अच्छा लगता है। हमारी तरह ही वह भी बोलने लगी है।

लहंगा और सहंगा पहनकर तापसी मिलती है गले
दादी कहती है कि मुझे बहुत अच्छा लग रहा हैं। रोज तापसी पन्नू और भूमि से मेरी मुलाकात होती है। तापसी मेरा किरदार बहुत अच्छे तरीके से निभा रही हैं। वह लहंगा भी पहनती है और सहंगा भी पहनती है, जो हम पहनते हैं। उन्होंने कहा कि वह सब काम करती है, जो हम करते हैं। उसको देखकर मुझे भी ऐसा लगाता है, जैसे मैं ही खड़ी हुं।