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सिपाही हत्याकांड में कुख्यात नीटू कैल दोषी करार, सजा के फैसले पर सुनवाई जल्द; खौफनाक थी वारदात

घटना 12 अक्टूबर 2011 की है। सिपाही की हत्या के बाद राइफल लूट ने पूरे यूपी में तहलका मचाया था। ये वो दौर था जब कुख्यात नीटू कैल की पश्चिम यूपी में तूती बोलती थी। घटना के 12 साल बाद कोर्ट ने नीटू कैल को इस मामले में दोषी करार दिया है।

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अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-10 की कोर्ट में हुई सुनवाई।

2010 के दशक में पश्चिम यूपी के बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर और मेरठ में नीटू कैल का आतंक था। नीटू कैल गिरोह दिल्ली एनसीआर में भी वसूली और अपहरण की घटनाओं को अंजाम देता था। 12 अक्टूबर 2011 को नीटू कैल ने यूपी पुलिस के सिपाही कृष्णपाल और अमित कुमार पर हमला कर राइफल लूटी थी। जिसके में गोली लगने से घायल सिपाही कृष्णपाल की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी। घटना शामली के थानाभवन इलाके की थी। 12 साल पहले सिपाही की हत्या कर राइफल लूटने के मामले में अब अदालत ने शामली के कुख्यात नीटू कैल पर हत्या और डकैती में दोष सिद्ध किया। जबकि सास-बहू सहित 11 आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-10 की पीठासीन अधिकारी हेमलता त्यागी ने ये फैसला सुनाया है। सजा के प्रश्न पर 29 सितंबर यानी कल सुनवाई होनी है।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता जसवीर सिंह और वकार अहमद ने बताया कि थाना थानाभवन की मस्तगढ़ पुलिया पर 12 अक्तूबर 2011 को अज्ञात लोगों ने सिपाही कृष्णपाल और अमित कुमार पर हमला कर राइफल लूटी थी। अस्पताल ले जाते हुए मेरठ निवासी कृष्णपाल की मौत हो गई थी। तत्कालीन एसओ अरुण कुमार त्यागी ने 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

इस पूरे प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-10 में हो रही है। बुधवार को अदालत ने शामली के कैल शिकारपुर की पूर्व प्रधान ओमकारी, उनकी बहू निशा, बेटे अमित के अलावा मोनू, सुधीर, सत्यवान, विकास, सिसौली के संजीव जयंती, बागपत के संजय, मनोज और यशपाल को दोषमुक्त करार दिया है। जबकि कैल शिकारपुर के नीटू को हत्या के साथ डकैती की धारा 396 में दोष सिद्ध किया है। सजा के प्रश्न पर 29 सितंबर को सुनवाई होगी।

ट्रायल के दौरान इनकी हो चुकी मौत
मुकदमे के ट्रायल के दौरान कैल शिकारपुर निवासी ऋषिपाल, धर्मेंद्र की मौत हो गई। बागपत के छपरौली में हुई मुठभेड़ में सुमित कैल मारा गया था। चांदनहेड़ी के संजीव की भी मौत हो चुकी है। कैल शिकारपुर निवासी ऋषिपाल और उनका बेटा अमित वारदात के समय जेल में बंद थे। पुलिस ने उन्हें धारा 120 बी का मुल्जिम बनाया था। ऋषिपाल की पत्नी ओमकारी, पुत्रवधू निशा और अमित को दोषमुक्त करार दिया गया है।

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दिल्ली पुलिस में है संजय
दोषमुक्त करार दी गई ओमकारी का भतीजा पलड़ा निवासी संजय दिल्ली पुलिस में दरोगा है। संजय को भी दोषमुक्त करार दिया गया है। वारदात में 14 पुलिसकर्मियों ने गवाही दी है। इसके अलावा बचाव पक्ष ने भी तीन गवाह अदालत में पेश किए। पुलिस ने अलग-अलग आरोप पत्र दाखिल किए थे। नौ आरोपी धारा 120 बी के बनाए गए थे।

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