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VIDEO: Ayodhya फैसले के बाद बढ़ाई गई लव-कुश जन्मस्थली की सुरक्षा, यहां आज भी मौजूद है माता सीता की कुटिया

Highlights: -अयोध्या में Shri Ram का जन्म हुआ तो बागपत में उनके दोनों पुत्र Luv-Kush की जन्मभूमि है -यहीं पर महर्षि वाल्मीकि आश्रम में माता सीता और श्रीराम के दोनों पुत्रों का जन्म हुआ था -हर वर्ष शुक्ल पक्ष की तीज पर यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है

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बागपत। वर्षों से चले आ रहे अयोध्या मामले (Ayodhya Verdict) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रामलला (Ram Mandir) के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। भगवान श्रीराम (Shri Ram) का पश्चिमी यूपी के बागपत Baghpat से भी नाता रहा है। जिसके सुबूत आज भी यहां पर मौजूद हैं। दरअसल, अयोध्या में श्रीराम का जन्म हुआ तो बागपत उनके दोनों पुत्र लव-कुश (Luv Kush) की जन्मभूमि है। जहां पर माता सीता ने शरण ली थी और यहीं पर महर्षि वाल्मीकि आश्रम में माता सीता और श्रीराम के दोनों पुत्रों का जन्म हुआ था। हर वर्ष शुक्ल पक्ष की तीज पर लव-कुश के जन्मदिन के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद यहां मौजूद मंदिर की भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

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बागपत के बालैनी थाना क्षेत्र में हिंडन नदी के किनारे वनीय क्षेत्र में महार्षि वाल्मीकि का आश्रम भी है। जिसमें माता सीता ने शरण ली थी और यहीं पर श्रीराम के दोनों पुत्र लव-कुश का जन्म भी हुआ था। मंदिर के महंत लक्ष्य देव आनंद का कहना है कि ये मंदिर ऐतिहासिक है। जहां पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है और माता सीता की कुटिया, माता सीता सती स्थल, लव-कुश का जन्मस्थल यहां पर आज भी मौजूद है। वही मंदिर के महंत का आरोप है कि केंद्र सरकार ने इसे पर्यटन स्थल तो घोषित कर दिया है, लेकिन कई साल बीत जाने पर भी मंदिर का सर्वे तक नहीं कराया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मंदिर की अनदेखी नहीं करने की अपील की है।

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गौरतलब है कि बागपत ऐतिहासिक दृष्टि से बड़ा ही अहम माना जाता है। कारण, यहां पर महाभारत और रामायण काल के सुबूत मिलते हैं। यहां पर वो लाखा ग्रह भी मौजूद है जिसे कौरवों ने पांडवों के लिए लाख से बनवाया था और वो सुरंग भी मौजूद है जिससे निकलकर पांडवों ने अपनी जान बचाई थी। इसके अलावा और भी महाभारत और रामायणकाल के सुबूत पुरातत्त्व विभाग को खुदाई में समय-समय पर मिलते रहते हैं।

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