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देश-दुनिया में पहुंची कोटजेवर की ब्लू पॉटरी, बढ रही मांग

पंचायत झरना के कोटजेवर ग्राम में दिन रात लगे सैकड़ों कारीगर

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बगरू

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Teekam Saini

Mar 23, 2018

Blue Pottery of Kotjevar Village

बिचून (जयपुर). भारतीय कला व संस्कृति को ब्लू पॉटरी व्यवसाय के माध्यम से उकेरकर उसे जीवंत रूप देने के लिए ग्राम पंचायत झरना के कोटजेवर ग्राम के सैकड़ों कारीगर दिन रात लगे हुए हैं। कोटजेवर ग्राम में तैयार होने वाली ब्लू पॉटरी की वस्तुओं की मांग न केवल जयपुर व इसके आसपास के शहरों में है बल्कि देश के विभिन्न स्थानों पर निर्यात की जाती है। इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की समस्याओं का समाधान कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई खास प्रयास नहीं करने से इस कार्य से जुड़े कारीगरों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ब्लू पॉटरी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले वयोवृद्ध कलाकार लालाराम प्रजापत व मुकेश प्रजापत ने बताया कि कोटजेवर ग्राम में दर्जनों परिवार लम्बे अर्से से इस कार्य से जुड़े हुए हैं तथा इससे ग्राम के युवाओं को उनके घर बैठे लगभग 350 से 500 रुपए की प्रतिदिन की मजदूरी मिलती है। इस व्यवसाय को चलाने के लिए विभिन्न ग्रुपों के माध्यम से ग्राम के सैकड़ों लोगों को रोजगार मिल रहा है। युवा कारीगर मुकेश कुमार ने बताया कि ब्लू पॉटरी आइटम को एक निर्धारित तापमान पर पकाया जाता है, लेकिन कोयला भट्टी से इसमें कभी तेज व कभी कम ताप लगने से इसके खराब होने की सम्भावना रहती है तथा कई बार तैयार किए गए कोयले का धुंआ लगने से आइटम खराब हो जाते हैं।

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यह वस्तुएं होती है तैयार
ग्राम में विभिन्न वस्तुओं के अलावा सजावट के सामान, हैंगर, बाथरूम सेट, विभिन्न प्रकार की टाइल्स, पोट, पशु-पक्षी की शक्ल के सजावटी आइटम तैयार किए जाते हैं। यहां तैयार होने वाले माल को बेचने के लिए दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई, कोलकाता, बैंगलुर व जयपुर सहित विभिन्न स्थानों पर भरने वाले राष्ट्रीय मेलों में सरकार की ओर से रियायती दर पर कारीगरों को जगह उपलब्ध कराई जाती है।

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देशी-विदेशी से आते पर्यटक
कोटजेवर से ब्लू पॉटरी की वस्तुएं खरीदने के लिए विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से कई बार देशी और विदेशी पर्यटक यहां आते हैं तथा ब्लू पॉटरी की वस्तुएं खरीदकर ले जाते हैं। इससे ग्राम के लोगों को इन सैलानियों से मिलकर उनकी संस्कृति को जानने और पहचानने का भी मौका मिलता है।

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ऐसे बनती है ब्लू पॉटरी
ब्लू पॉटरी बनाने वाले कारीगरों को ब्यावर से स्टोन पाउडर लाना पड़ता है। स्टोन पाउडर में कतिरा गोंद, मुलतानी मिट्टी, सादा मिट्टी व गिलास के कांच का मिश्रण कर शाम को भिगोकर रखना पड़ता है। दूसरे दिन सुबह इसकी विभिन्न प्रकार से ढलाई की जाती है, बाद में आइटम की साफ-सफाई कर सफेद कोटिंग की जाती है। आइटम पर बारीक स्टोन पाउटर, गिलाश का कांच, मैदा की लई का घेाल बनाकर कोटिंग की जाती है व कोटिंग के बाद डिजाइन व रंग कर ग्लेज किया जाता है। ब्लू पॉटरी पकाने के लिए आइटम पर पोटेशियम नाइट्रेट, जिंक आक्साइड, सुहागा व कांच का लेप होता है व इसके बाद इसे निर्धारित तापमान पर पकाने के बाद आइटम तैयार होता है।