
सामोद/चीथवाड़ी/गोविन्दगढ़ (चौमूं/जयपुर). कस्बे की अधिकांश ग्राम पंचायतों में पिछले कई दिनों से साफ-सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। न घर-घर कचरा संग्रहण हो रहा है और ना ही उसका पृथकीकरण। ऐसे में गली, मोहल्लों, आम रास्तों और चौराहों पर भी कचरा नजर आने लगा है। मनरेगा मजदूरों के हाथ सफाई कार्य छीनने के चलते पंचातयों में कचरे के ढेर दिखने शुरू हो गए हैं। ऐसा राज्य सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से जारी नए आदेश के चलते हुआ है। इस आदेश के अनुसार महात्मा गांधी मनरेगा योजना के तहत अब पंचायतें कचरा संग्रहण और पृथकीकरण का कार्य नहीं करवा सकती हैं। ऐसे में गांवों में सफाई व्यवस्था पर पिछले कुछ दिनों में विराम सा लग गया है। ऐसे में अब फिर से पंचायतों को पहले की तरह ठेके पर सफाई करवानी पड़ेगी।
ये है पंचायती राज विभाग का आदेश
राज्य सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के महात्मा गांधी नरेगा (अनुभाग-3) शासन सचिवालय की ओर से इस संबंध में 10 फरवरी को आदेश जारी किए गए। विभाग के परियोजना निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव, ईजीएस द्वारा जारी विभागीय पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 'निर्देशों के अनुरूप घर-घर कचरा संग्रहण तथा पृथकीकरण के कार्य हेतु नियोजित श्रमिकों का मजदूरी भुगतान महात्मा गांधी मनरेगा योजना से तुरंत रोका जाए। भविष्य में इस कार्य हेतु मस्टरोल जारी नहीं किए जाएं तथा महात्मा गांधी मनरेगा योजनांतर्गत पत्र में वर्णित कार्य ही किए जाएं। शेष कार्य संदर्भित पत्र में वर्णित अनुसार तथा ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग की अन्य योजनाओं में नियमानुसार किया जाए। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से यह पत्र सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को भेजा गया है।
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कहां खो गया 'स्वच्छ भारत मिशन'
पंचायत समिति गोविंदगढ़ की सामोद, कुशलपुरा, विजयसिंहपुरा, मोरीजा सहित कई ग्राम पंचायतों में इस आदेश के बाद तो 'स्वच्छ भारत मिशन' खो सा गया है। जब से आदेश आए हैं, तभी से यहां सफाई कार्य नहीं हो रहा है। मनरेगा के तहत पंचायत क्षेत्रों में सफाई कार्य के भुगतान पर रोक से यहां गंदगी फैलने लगी है। इससे ग्राम के गली-मोहल्ले और चौराहों पर कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं।
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फिर से होगी पहले वाली व्यवस्था
मनरेगा से पहले पंचायतों में ठेके पर सफाई कार्य करवाया जा रहा था। इसलिए अब फिर से वहीं व्यवस्था करनी होगी। पंचायतों को बैठक में प्रस्ताव लेकर सफाई का ठेका करना होगा। फिलहाल इस प्रक्रिया में भी समय लगेगा। ऐसे में पंचायतों को जल्द ही अपने-अपने स्तर पर सफाई की कमान संभालते हुए वैकल्पिक व्यवस्था करवानी होगी। हालांकि कई ग्राम पंचायतों में ठेके के मजदूरों से सफाई करवाई जा रही है।
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यह कहते हैं स्थानीय सरपंच
इस संबंध में सरपंचों का कहना है कि विभाग की ओर से मनरेगा कर्मियों से सफाई करवााने पर विभाग की ओर से पेमेंट का भुगतान नहीं करने का आदेश लिखित में नहीं मिला है, लेकिन मौखिक तौर पर हुई घोषणा के बाद से ही सफाई के लिए लगा रखे मनरेगा कर्मियों का हटा दिया गया है। मनरेगा कर्मियों से सफाई करवाने और विभाग से पेमेंट सेंक्शन के लिए जिला परिषद में फाइल भेजी थी, लेकिन पेमेंट के भुगतान पर रोक के आदेश के बाद फाइल को रोक दिया है।
Published on:
19 Feb 2018 04:00 pm
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