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कभी लहलहाती थी फसलें, आज हुआ वीरान

— भूजल स्तर गिरा, खेत हो गए बंजर- जलस्तर 400 से 500 फीट तक पहुंचा- कई गांवों में 80 प्रतिशत तक जमीन हुई बेकार

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manshabhim singh news

कभी लहलहाती थी फसलें, आज हुआ वीरान

मण्ढ़ाभीमसिंह. गिरते भूजलस्तर के कारण क्षेत्र के आधे से अधिक खेत बंजर होने के कगार पर हैं। क्षेत्र के अधिकतर गांवों में पानी सूख चुका है। ट्यूबवेल में भी 400 से 500 फीट के बाद ही पानी निकल पाता है। कई गांव तो ऐसे हैं, जहां किसानों द्वारा पांच सौ फीट से अधिक खुदवाने के बाद भी पानी नहीं मिल रहा है। वहीं कस्बे सहित आसपास के गांवों में आधे से अधिक ट्यूबवेल सूख चुके हैं। इसके चलते पिछले एक दशक के दौरान ही आठ सौ किसानों ने कुओं से बिजली कनेकशन कटा लिए हैं। हालात यह है कि कई गांवों में तो 80 प्रतिशत तक भाग बंजर हो चुका है। भूजल स्तर गिरने की अगर यही रफ्तार रही तो आने वाले कुछ वर्षों में क्षेत्र बंजर हो जाएगा। प्रतिवर्ष जलस्तर 15 से 20 फीट नीचे जा रहा है। पांच वर्ष पूर्व जहां 15 नोजल फव्वारे चलते थे, वहां अब मात्र 4—5 पर आ गए हैं।

यहां 70 फीसदी सूख चुका पानी
भैंसलाना, भादवा, मुण्डोती, सुखालपुरा, अणतपुरा, प्रतापपुरा, लालासर, सलहदीपुरा, नांदरी, गुर्जरों का बास, श्यामपुरा, सिनोदिया, देवलीकलां, मीण्डा, मण्ढाभीमसिंह में 50 से 70 प्रतिशत ट्यूबवेल सूख चुके हैं।

कट रहे बिजली कनेक्शन
बिजली निगम के आंकड़ों के अनुसार कस्बे सहित आसपास की 20 पंचायतों में वर्तमान में 4103 कृषि कनेकशन चालू हैं, जबकि 10 वर्ष के दौरान करीब 800 कृषि कनेक्शन कट चुके हैं।

किसानों पर दोहरी मार
एक ओर पानी की कमी से खेत वीरान हो रहे है। वहीं दूसरी ओर बिजली के बिल की किसानों पर मार पड़ रही है। पहले भरपूर पानी था तो 15 से 20 नोजल फव्वारें रोजाना चलते थे। अब मात्र 4 से 5 चलते हैं, लेकिन मोटर चलने से यूनिट पूरा निकालती है। इससे बिल पूरा आता है। किसानों का कहना है कि पानी की आवक कम हुई तो उसी अनुपात में बिल आना चाहिए।

एक दशक में 30 प्रतिशत घटा सिंचित क्षेत्र
कृषि विभाग केे अनुसार पिछले दस वर्ष के दौरान क्षेत्र का 30 प्रतिशत सिंचित क्षेत्र कम हुआ है। सहायक कृषि अधिकारी श्रवण लाल ने बताया कि वर्ष 2016 में कुल 18986 हैक्टेयर भूमि में 4642 हैक्टेयर सिंचित था। अब यह आंकड़ा करीब 30 फीसदी तक घट गया है।