रमाकांत दाधीच
जयपुर. किसी गांव में हॉकी के प्रति जुनून देखना हो तो प्रदेश के टोंक जिले के छोटे से गांव लावा में चले आइए। यहां की आबादी करीब दस हजार है, लेकिन इसे जिले में हॉकी की नर्सरी और खेल गांव के नाम से जाना जाता है। गांव की हर गली में राज्य व राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी मिल जाएंगे। यह गांव प्रदेश का पहला ऐसा गांव है जहां सर्वाधिक शारीरिक शिक्षक हैं। यहां वर्तमान में 150 से अधिक पीटीआई हैं। जो प्रदेश के विभिन्न जिलों में पद स्थापित हैं। एक ग्राम पंचायत क्षेत्र से 400 से अधिक राज्य व राष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी देने वाला भी यह राज्य का अकेला गांव हैं। हॉकी के प्रति गंगानगर, कोटा, अजमेर और बीकानेर के खिलाडिय़ों में लगाव देखा जाता है, लेकिन ग्रामीण अंचल में राज्य में इस गांव में इन शहरों से भी ज्यादा खिलाड़ी हैं। लेकिन सुविधाओं के अभाव में प्रतिभाएं मुरझा रही है।
किसी गांव में पहली बार हुआ राज्य स्तरीय हॉकी टूर्नामेंट
यहां हॉकी के प्रति ग्रामीणों की भी रुचि है। वर्ष 2022 में यहां प्रदेश में पहली बार किसी ग्राम पंचायत मुख्यालय पर राज्यस्तरीय सीनियर हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसका बीड़ा ग्रामीणों ने उठाया। जबकि अब तक प्रदेश में सिर्फ उपखंड मुख्यालय या जिला मुख्यालयों पर ही राज्य स्तरीय सीनियर हॉकी प्रतियोगिताओं का आयोजन होता रहा है।
एक ही परिवार की दो पीढिय़ां पीटीआई
यहां हॉकी खेल पीढ़ी दर पीढ़ी खेला जाने वाला खेल बन गया है। कई परिवार तो ऐसे हैं जिसकी तीसरी पीढ़ी हॉकी खेल रही है। एक परिवार में तो दो पीढिय़ों के छह शारीरिक शिक्षक हैं। उनमें जहूरद्दीन के पुत्र शहजाद खान, नसरूद्दीन और शरफूद्दीन तीनों भाई शारीरिक शिक्षक हैं। नसरूद्दीन के तीन पुत्र और एक पुत्रवधू भी शारीरिक शिक्षक हैं। वहीं कई परिवार ऐसे हैं जिसमें दो भाई, चाचा-भतीजा पीटीआई हैं।
सरकारी घोषणा थोथी साबित
सुविधाएं हो तो गांव के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर सकते हैं। वर्ष 2022 में यहां राज्य स्तरीय टूर्नामेंट के दौरान उद्घाटन समारोह में तत्कालीन खेल मंत्री अशोक चांदना ने यहां स्टेडियम निर्माण के लिए 50 लाख रुपए देने की घोषणा की थी, जिससे मिनी स्टेडियम बनाया जा सके। लेकिन यह घोषणा थोथी साबित हुई। वो राशि अब तक नहीं आई।
खिलाडिय़ों को कोई सुविधा नहीं
यहां खिलाडिय़ों को सुविधा के नाम पर सिर्फ एक मैदान और लोहे के गोल पोस्ट हैं। जबकि उभरती प्रतिभाओं के लिए यहां उच्च स्तरीय सुविधायुक्त मैदान हो, कोच की व्यवस्था हो तो यहां की हॉकी प्रतिभाएं देश में नाम रोशन कर सकती है।
एस्ट्रो टर्फ का बने मैदान
युवा खिलाडिय़ों का सपना है कि यहां स्टेडियम के साथ ही एस्ट्रो टर्फ का मैदान हो। जिससे उन्हें अभ्यास में मदद मिले। अभी यहां सपाट मैदान है, जिस पर घास भी नहीं है। मैदान में कई जगह घास की बजाय कांटेदार पौधे हैं, जिससे खिलाड़ी कई बार चोटिल हो चुके हैं।
इनका कहना है…
– गांव के खिलाडिय़ों ने राष्ट्रीय स्तर पर गांव का नाम रोशन किया है। पंचायत ने अपने स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध करवाने की कोशिश की है, लेकिन एस्ट्रोटर्फ जैसा मैदान विभाग तैयार करवाए तो यहां और अच्छे खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।
कमल जैन, सरपंच
ग्राम पंचायत लावा