18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आरओ प्लांट के पानी की नहीं होती जांच, शुद्धता पर सवालिया निशान

— ग्रामीण इलाके में प्रतिष्ठानों, घरों में सप्लाई किया जा रहा— जिले में 80 से अधिक निजी आरओ प्लांट— प्रतिदिन हो रही तीन लाख लीटर से अधिक पानी की सप्लाई

2 min read
Google source verification

बगरू

image

Narottam Sharma

Sep 02, 2021

आरओ प्लांट के पानी की नहीं होती जांच, शुद्धता पर सवालिया निशान

आरओ प्लांट के पानी की नहीं होती जांच, शुद्धता पर सवालिया निशान

नरोत्तम शर्मा
जयपुर. जिले में खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से खाद्य पदार्थों की समय—समय पर जांच कर मिलावट पकड़ी जाती है, लेकिन पेयजल की गुणवत्ता जांचने को लेकर कोई भी गंभीर नहीं है। उपभोक्ता अपने स्तर पर पेयजल की जांच करवाना चाहे तो करवा सकता है, लेकिन विभागीय स्तर पर इसके लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं है। इसके साथ ही निजी आरओ प्लांट के पानी की जांच की भी कोई व्यवस्था नहीं है। उपभोक्ता किस प्रकार का पानी पी रहे हैं वो शुद्ध है या नहीं इसकी जानकारी तक उन्हें नहीं मिल पाती है। मजबूरी में उपभोक्ताओं को रुपए खर्च करने के बाद भी पता नहीं चलता कि वो किस तरह का पानी पी रहे हैं। जिले में घरों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर निजी आरओ प्लांट से कैम्पर के जरिए पानी की सप्लाई की जाती है। इसके अतिरिक्त लोगों ने घरों में छोटे मोटे आयोजनों में भी कैम्पर मंगवाना शुरू कर दिया है। जयपुर जिले में 80 से अधिक निजी आरओ प्लांट से प्रतिदिन करीब तीन लाख लीटर पानी की सप्लाई की जा रही है।

आरओ प्लांट ले चुका उद्योग का रूप
जिले में निजी स्तर पर आरओ प्लांट उद्योग का रूप ले चुका है। इसका अब शहरों के बाद कस्बों तक फैलाव हो चुका है। वहीं दूदू इलाके में तो कई औद्योगिक इकाइयां लगने से की कैम्पर से पानी की मांग और बढ़ी है। फ्लोराइडयुक्त इलाकों में आरओ प्लांट से पानी की खरीद अधिक होती है।

इतने रुपए में मिलता है कैम्पर
जिले में 10 रुपए में 10 लीटर व 20 रुपए में 20 लीटर का कैम्पर आरओ प्लांट से मिल रहा है। इसके लिए बाकायदा आरओ प्लांट से पांच हजार लीटर क्षमता की टंकी में पानी भरकर घरों—प्रतिष्ठानों में सप्लाई किया जाता है।

अशु्द्ध पानी पीने से होने वाले रोग
त्वचा विकार, पथरी, वायरल, हैपेटाइटिस या पीलिया, हैजा, पोलियो, टाइफाइड, अतिसार, रोटा वायरस, डायरिया और कीड़े होना।

यह है पेयजल की स्थिति
शुद्ध पानी में टीडीएस की मात्रा 0 से 500 पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) होनी चाहिए। साथ ही पीएच लेवल 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। इससे ज्यादा होने पर यह नुकसानदेह है। निजी आरओ से सप्लाई किए जाने वाले पानी में टीडीएस व पीएच की भी जांच नहीं होती।

प्रत्येक उपभोक्ता को है अधिकार फिर भी सुनवाई नहीं
प्रदेश में उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए बाकायदा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम—1986 लागू है। इसके बावजूद अभी तक उपभोक्ता पेयजल जांच से संबंधित अपने अधिकार से वंचित हैं।

जयपुर जिले का हाल...

उपखंड क्षेत्र : बस्सी
निजी आरओ प्लांट : 12
पेयजल की खपत : 15000 लीटर प्रतिदिन

उपखंड क्षेत्र : कोटपूतली
निजी आरओ प्लांट : 22
पेयजल की खपत : 132000 लीटर प्रतिदिन

उपखंड क्षेत्र : चौमूं
निजी आरओ प्लांट : 14
पेयजल की खपत : 25 हजार लीटर प्रतिदिन

उपखंड क्षेत्र : दूदू
निजी आरओ प्लांट : 06
पेयजल की खपत- 42000 लीटर प्रतिदिन

उपखंड क्षेत्र : शाहपुरा
निजी आरओ प्लांट : 03
पेयजल की खपत : 10000 लीटर प्रतिदिन

जिम्मेदार बोले...
मैं अभी नई आई हूं। निजी आरओ प्लांट के पानी की जांच के संबंध में पता करवा लेती हूं। जानकारी कर ही बता सकूंगी कि पानी जांच का कोई प्रावधान है क्या।
प्रतिभा पारीक, जिला रसद अधिकारी जयपुर द्वितीय