
सामोद (जयपुर). भवन के अभाव में सामोद सीएचसी की सेवाएं ठप हैं। बरामदों में बना रखे वार्ड से जहां संक्रमण फैलने का अंदेशा है वहीं महिला चिकित्सक की कमी प्रसूताओं की पीड़ा बढ़ा रही है। ऐसे में मजबूरन प्रसूताओं को निजी चिकित्सालयों की ओर रुख करना पड़ता है। अगर पिछले एक साल के आकड़ों पर गौर करें तो नामांकित प्रसूताओं में से महज 6 फीसदी का प्रसव हो पाया है। जबकि 94 फीसदी महिलाओं को या तो निजी अस्पताल या दूर-दराज के अस्पतालों में प्रसव कराना पड़ा।
कस्बे सहित आसपास के 8-10 गांवों के लिए महिलाओं के प्रसव एवं चिकित्सीय परामर्श का एक मात्र केन्द्र सीएचसी होने से यहां रोगियों की खासी भीड़ रहती है। सुविधाओं व महिला चिकित्सक की कमी के चलते महिलाएं यहां प्रसव कराने में असहज महसूस करती हैं। एक साल में यहां मात्र सोलह प्रसव कराए गए हैं जबकि सामोद सीएचसी में 259 गर्भवती महिलाओं का नामांकन हुआ था। प्रसव से पूर्व तक उपचार यहां लिया लेकिन प्रसव दूसरी जगह कराया।
भवन के अभाव में बढ़ रही परेशानी
सीएचसी के पास पर्याप्त भवन नहीं होने के कारण बरामदों में बैड लगा कर वार्ड बना रखा है। वहीं महिलाओं के लिए अलग से वार्ड की व्यवस्था नहीं होने से संक्रमण फैलने का भी अंदेशा रहता है। कहने को तो सीएचसी के पास भामाशाहों द्वारा भेंट किए गए 30 से भी अधिक बैड हैं लेकिन जगह नहीं होने से ये धूल फांक रहे हैं।
दो चिकित्सकों के भरोसे सीएचसी
सामोद सीएचसी में चिकित्सकों के पांच पद स्वीकृत हैं लेकिन दो चिकित्सकों को प्रतिनियुक्ति पर जाने व एक चिकित्सक पिछले एक साल से ट्रेनिंग के कारण अनुपस्थित है। ऐसे में सीएचसी का भार दो डॉक्टर्स के कंधों पर है। वहीं सीनियर मेल नर्स के दोनों पद रिक्त होने से मुश्किलें बढ़ गई है।
जमीन पूरी, भवन स्वीकृति नहीं
सामोद सीएचसी वर्ष 2013 में क्रमोन्नत की गई थी लेकिन पीएचसी के भवन में ही सीएचसी का संचालन किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि सीएचसी के पास जगह का अभाव हो। सीचएसी भवन के लिए 2400 वर्गगज की आवश्यकता होती है जबकि यहां तीन हजार वर्गगज जगह है। पंचायत ने 2400 वर्गगज का पटटा भी सीएचसी को दे दिया लेकिन भवन स्वीकृति नहीं मिलने से परेशानी बढ़ रही है।
Published on:
29 Apr 2018 09:10 pm
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