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बच्चे की उंगलियों को डस लिया था कोबरा ने, जान जोखिम में डालकर इस तरह बचाई ड़क्टर ने जान

10 साल के बच्चे की जान बचाने के लिये अपनी जान जोख़िम में डाली इस डॉक्टर ने

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बच्चे की उंगलियों को डस लिया था कोबरा ने, जान जोखिम में डालकर इस तरह बचाई ड़क्टर ने जान

बहराइच. आज पूरा देश धरती का भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों की याद में "डॉक्टर्स डे" का पर्व बड़ी धूम धाम से मना रहे हैं। कहते हैं कि डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं और धरती पर इसी अवतार के प्रति अपना सम्मान प्रकट करने के लिये पूरे भारत वर्ष में "डॉक्टर्स डे" प्रति वर्ष जुलाई माह की पहली तारीख को मनाया जाता है। पेशे से डॉक्टर होना अपने आप में एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, शायद यही वजह है कि इस कवच को धारण करने वाले हर एक डॉक्टर को अपनी प्रेक्टिश शुरू करने से पहले इस बात की शपथ लेनी पड़ती है कि वो अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाने का वचन देते हैं।

डॉक्टर ने दिखाया बहादुरी का काम

कुछ इसी कसम को निभाने वाली एक जिंदा मिशाल भारत नेपाल बार्डर के जिले बहराइच में देखने को मिली। जहाँ के जिला अस्पताल के CMS डॉ. ओपी पाण्डेय ने अपनी जान की परवाह किये बिना एक बच्चे की जान बचायी। इसके लिये देर रात से लेकर भोर का सूरज निकलने तक करीब 4 घंटे तलक एक पाईप की मदद से उसको जिंदा बचाने के लिये अपनी सांस उसके बदन में देकर बच्चे की जान बचाने की कोशिश में जुटे रहे। इस विधि को अपनाकर CMS ने दम तोड़ चुके बच्चे की जान वापस लाने में कामयाब रहे और उसे जिला अस्पताल के PICU यूनिट में वेंटिलेटर पर शिफ्ट करा कर बेहतर इलाज के लिये उसे लखनऊ रिफर करा दिया। लेकिन डाक्टरों की लाख सलाह के बावजूद बच्चे के परिजन उसे लखनऊ नहीं ले गए और अंततः बच्चे ने देर शाम दम तोड़ दिया।

कोबरा ने डस ली थी उंगलियां

जानकारी के मुताबिक हरियाणा प्रान्त के करनाल शहर के रहने वाले अनुराग का 10 वर्सीय बेटा सागर बहराइच के पयागपुर इलाके में अपनी नानी के घर ननिहाल में मां के साथ गर्मी की छुट्टी मनाने आया था। इसी दौरान बीते 27 जून की रात करीब 01:30 बजे के आस पास अपनी मां के साथ बिस्तर पर सो रहे 10 वर्सीय सागर को जहरीले किंग कोबरा ने उसकी दो उंगलियों में बुरी तरह डस लिया। इस दौरान बच्चे की चीख सुनकर जब लोगों की आंख खुली, तो रोशनी जलाकर देखा। किंग कोबरा सांप देख लोगों के होश फाख्ता हो गए। फिर क्या था किसी तरह सांप को मारकर आनन फानन में बच्चे को लेकर इलाज के लिये बहराइच जिला अस्पताल रात करीब 02:30 बजे पहुंचे।

यहां ड्यूटी पर तैनात (EMO) डॉ. रामेंद्र त्रिपाठी ने बच्चे की हालत को देख तत्काल फिजिशियन डॉक्टर प्रभाकर मिश्रा को अर्जेंट काल पर बुलाया। इस दौरान दोनों डॉक्टर बच्चे की जान बचाने में जुटे रहे इस वहीं इलाज के दौरान 10 वर्सीय सागर की जान जाते देख अस्पताल के स्टाफ ने मामले की जानकारी जिला अस्पताल के CMS डॉ ओपी पांडेय को दी। इस सूचना पर रात करीब 3 बजे इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे CMS ने जरा भी समय जाया किये पहले उसके बदन में अम्बु बैग से कृतिम सांस देकर बच्चे की सांस वापस लाने की पूरी कोशिश की। लेकिन जब अम्बु बैग से बच्चे की सांस किसी माईने में नहीं लौटी तो अपनी जान की बाजी लगाकर जिला अस्पताल के CMS डॉ. ओपी पांडेय ने एक पतली से पाईप के सहारे अपने मुँह की सांस बच्चे के मुँह में ट्रांसफर करके करीब 4 घण्टों के अथक प्रयास के बाद वापस लौटा कर जान बचाने की मिशाल पेश कर डाली।

बात करने में असमर्थता

इस पूरे आपरेशन में इमरजेंसी वार्ड का मेल स्टाफ नर्स जितेंद्र ने भी डाक्टरों की टीम के साथ अंतिम क्षण तक डटा रहा। लेकिन बच्चे के परिजनों की जिद और लापरवाही का ही नतीजा माना जाएगा कि लखनऊ न ले जाने के कारण ही 10 वर्सीय मासूम सागर असमय मौत के गाल में समा गया। बच्चे के मौत की खबर पाकर अस्पताल के स्टाफ ने काफी दुख प्रकट किया। इस दौरान अस्पताल में भर्ती 10 वर्सीय बच्चे की देखरेख में लगा स्टाफ नर्स जितेंद्र ने बताया कि बच्चा काफी सुंदर और काफी स्मार्ट था। मुंह से बोलने में असमर्थता के बावजूद उसने इशारों में बोलकर कांपी और कलम मंगाई। उसके बाद उसे जिस भी चीज की जरूरत महसूस होती थी। उसे कांपी में लिखकर मांगता था या फिर अपने हाँथ में लिखकर डिमांड करता था। लेकिन बहराइच जिला अस्पताल के CMS ने बच्चे के बदन में भरे सांप के जहर का असर खत्म करने के लिये कई घण्टों तक अपने मुंह से बच्चे के मुँह में कृतिम सांस का ट्रांसप्लांट कर अपनी जिम्मेदारी का फर्ज अंतिम क्षण तक निभाते नजर आए।