
सदन में बोलते बहराइच सांसद फोटो सोर्स फेसबुक वीडियो के स्क्रीनशॉट से
बहराइच के सांसद डॉ. आनंद कुमार गोंड ने लोकसभा में बच्चों के बीच बढ़ते सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने शून्यकाल के दौरान कहा कि कम उम्र में सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास को प्रभावित कर रहा है। सांसद ने सरकार से 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने और सुरक्षित डिजिटल माहौल सुनिश्चित करने की मांग की।
लोकसभा में शून्यकाल के दौरान बहराइच के सांसद डॉ. आनंद कुमार गोंड ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए बच्चों पर सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश तेजी से डिजिटल युग की ओर बढ़ रहा है। और इससे लोगों को कई सुविधाएं मिल रही हैं। लेकिन इसके साथ बच्चों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी हो गई है। सांसद ने बताया कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है। जहां बड़ी संख्या में बच्चे और युवा इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन कम उम्र में इसका अधिक और बिना नियंत्रण के इस्तेमाल बच्चों के मानसिक, सामाजिक और पढ़ाई से जुड़े विकास पर नकारात्मक असर डाल रहा है।
उन्होंने कहा कि छोटे बच्चे सही और गलत के बीच अंतर समझने में पूरी तरह सक्षम नहीं होते। ऐसे में वे आसानी से गलत जानकारी, फर्जी वीडियो (डीपफेक), साइबर बुलिंग और अनुचित कंटेंट के संपर्क में आ जाते हैं। इसका असर उनके व्यवहार और मानसिक स्थिति पर भी देखने को मिलता है। डॉ. गोंड के अनुसार, इस तरह की गतिविधियों के कारण बच्चों में तनाव, अवसाद, ध्यान की कमी, नींद में परेशानी और आत्मविश्वास में गिरावट जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि कम उम्र में सोशल मीडिया की लत बच्चों के लिए नुकसानदायक है।
सांसद ने यह भी कहा कि दुनिया के कई देश इस खतरे को समझते हुए कदम उठा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर ऑस्ट्रेलिया जैसे देश 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाने की दिशा में काम कर रहे हैं। अंत में उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को नियंत्रित किया जाए। सख्त आयु सत्यापन प्रणाली लागू की जाए। सोशल मीडिया कंपनियों के लिए स्पष्ट और कड़े नियम बनाए जाएं। ताकि बच्चों को सुरक्षित डिजिटल माहौल मिल सके।
Published on:
02 Apr 2026 10:46 pm
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