
जन्म और मृत्यु जीवन का सबसे बड़ा शास्त्र है - तपोमति माताजी
बालाघाट. पयुर्षण पर्व के अवसर पर महावीर भवन में विराजित आर्यिकारत्न तपोमति माताजी व ब्रम्हचारिणी पिंकी ने उपस्थितजनों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि असंयम का लिबास ओढ़कर असत्यवान प्रभु की सच्ची भक्ति व आत्मानुभूति व घर समाज में एकता स्थापित कर नहीं सकता। घर संसार एक मकड़ी का जाल है। उन्होंने कहा कि घर महल पर इतराओ मत जो महज एक मरघट है। जहां से अपने व पराए की अनेकों अर्थियां निकल चुकी है।
तपोमति माताजी ने कहा कि हर प्राणी की मृत्यु अटल सत्य है उससे कभी भय मत करो। अपने कर्मो से, कुकर्मो से, मृत्यु को सुधारने से मृत्यु कभी नहीं सुधरती। जीवन को सुधारने से मृत्यु सहज ही सुधर जाती है। किसी भी अर्थी से नजर मत चुराना अपितु उससे अपनी अर्थी की सबक ले लेना और इस दशलक्षण धर्मो का पालन कर जीवन को सुधार लेना। उन्होंने कहा कि मनुष्य भौतिकता का जाल में इस तरह फंस गया है कि जीवन के सबसे बड़े सत्य मृत्यु को भूल गया है। जन्म और मृत्यु जीवन का सबसे बड़ा शास्त्र है। जिसने इस सत्य को आत्म मंथन कर समझ लिया समझो उसने उत्तम क्षमा मांग कर मार्दव, आर्जव, सत्य, संयम धर्म को अपनाकर तप त्याग कर आकिन्चित होकर ब्रम्हचर्य वृत धारण कर ब्रम्ह में लीन होकर अपनी आत्मा को परमात्मा बनाने की ओर कदम बढ़ा लिया। उक्त आशय की जानकारी परोपकार तीर्थधाम के संयोजक राकेश देवडिय़ा ने दी।
Published on:
12 Sept 2019 07:54 pm
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