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खतरों भरा सफर – जान जोखिम में डालकर ऊफनती नदी पार कर रहे ग्रामीण

हाथ पकडकऱ राहगीरों को पार करा रहे ग्रामीण, कभी भी हो सकता है गंभीर हादसा, बालाघाट-नैनपुर मार्ग पर मानकुंवर नदी का मामला

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बालाघाट. घर जाने की जल्दी में अपनी जिंदगी को दांव पर लगा रहे राहगीर। जान जोखिम में डालकर उफनती नदी को कर रहे पार। कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है। मामला बालाघाट से नैनपुर मार्ग पर मानकुंवर नदी का है।
बालाघाट-नैनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 543 में स्थित मानकुंवर नदी का पुल क्षतिग्रस्त है। डायवर्जन मार्ग भी पहली बारिश में बह गया। प्रशासन ने बारिश नहीं होने पर ग्रामीणों के आवागमन के लिए वैकल्पिक रुप से पद मार्ग तैयार किया था। लेकिन राहगीर अब इसी मार्ग से आना-जाना कर रहे हैं। मौजूदा समय में बारिश हो रही है। नदी का जल स्तर भी बढ़ रहा है। ऐसे में राहगीरों की थोड़ी सी लापरवाही उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है। बावजूद इसके न तो उन्हें कोई रोकने-टोकने वाला है।
जानकारी के अनुसार बालाघाट-नैनपुर मार्ग पर चांगोटोला और गुडरु के बीच घंघरिया गांव के समीप बहने वाली मानकुंवर नदी का डायवर्जन पुल 28 जून को पानी में बह गया। जिसके कारण नैनपुर से लेकर बालाघाट के बीच का सडक़ सम्पर्क टूटा हुआ है। इसके पूर्व 2 मई को भी यह पुल बारिश के पानी में बह गया था। अगस्त 2022 में हुई तेज बारिश के कारण मानकुंवर नदी में बाढ़ आ गई थी। जिसकी वजह से मुख्य मार्ग पर बना पुल बहा था। तब से मुख्य मार्ग पर पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। आवागमन के लिए डायवर्जन पुल बनाया गया था। जो दो माह में दो बार बह गया है। इधर, बारिश नहीं होने पर प्रशासन ने सूखे दिनों के लिए पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से पर पदयात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की थी। अब बारिश होने पर राहगीर उसी मार्ग से अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं।
थोड़ी सी लापरवाही से हो सकता है हादसा
विडम्बना यह है कि यहां पर ग्रामीण ही राहगीरों को हाथ पकडकऱ नदी पार करा रहे हैं। ऐसे में कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है। हादसे की संभावना उस समय अधिक बढ़ जाती है जब बारिश होते रहती है। मानकुंवर नदी में अभी पानी का प्रवाह तेज होने लगा है। ऐसे में राहगीरों का आवागमन करना खतरों भरा सफर हो सकता है।
पदयात्रियों के साथ बाइक चालक भी हो रहे पार
नदी के क्षतिग्रस्त मार्ग से पदयात्रियों के साथ बाइक सवार भी पार हो रहे हैं। पानी के तेज के प्रवाह से बाइक अनियंत्रित भी हो रही है, लेकिन घर पहुंचने की जल्दबाजी में वे अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
दो दर्जन से अधिक गांव हो रहे प्रभावित
मानकुंवर नदी का पुल बह जाने से क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांव की आबादी प्रभावित हो रही है। खासतौर पर मानकुंवर नदी के उस पार निवास करने वाले गुडरु, घंघरिया, हिरमनटोला, ठाकुरटोला, कुकड़ा, बरखो, सकरी, सेमरटोला, देवसर्रा, पाटादाहा, सोनखार, ग्वारीटोला, पाद्रीगंज, कोटा सहित अन्य गांव के ग्रामीण परेशान हो रहे हैं। इन सभी गांव की 12 हजार से अधिक की आबादी का सडक़ सम्पर्क टूटा हुआ है।