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उत्कृष्ट हाईस्कूल में नहीं अंग्रेजी माध्यम

राज्य सरकार की लापरवाही से सैकड़ों विद्यार्थी परेशान

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बालाघाट. कटंगी राज्य सरकार ने वर्ष 2015 में प्रदेश के समस्त जिला स्तरीय एवं विकासखंड स्तरीय माध्यमिक उत्कृष्ट विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम की शुरूआत की है। लेकिन इसके बाद अब तक किसी भी विकासखंड स्तरीय उत्कृष्ट हाईस्कूल में अंग्रेजी माध्यम को शुरू नहीं किया है। जिससे 8 वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य चौपट हो रहा है। राज्य सरकार की इस लापरवाही से विद्यार्थी काफी परेशान है। वहीं बच्चों की शिक्षा को लेकर अभिभावक भी काफी चिंतित है।
जानकारी अनुसार विखं कटंगी के शासकीय उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय से 100 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए है। जो उत्कृष्ट हाईस्कूल में अंग्रेजी माध्यम नहीं होने से भटक रहे हैं। इधर, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि इस समस्या को लेकर खामोश बैठे हुए हैं।
जिला उत्कृष्ट विद्यालय में अंग्रेजी माध्यम-
जानकारी अनुसार जिला स्तर के शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय बालाघाट (हाईस्कूल) में अंग्रेजी माध्यम को स्वीकृति मिली है। हालाकिं यहां कितने बच्चों को प्रवेश मिलेगा इस बारे में अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है। गौरतलब हो कि उत्कृष्ट विद्यालय में प्रवेश पाने के लिए सभी विखं के सैकड़ों 8 वीं उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों ने 4 मार्च को परीक्षा दी है। जबकि कुछ विद्यार्थियों ने मॉडल स्कूल बैहर के लिए भी प्रवेश परीक्षा दी है। लेकिन सूत्रों की माने तो वहां केवल 2 शिक्षक होने के कारण विद्यार्थी प्रवेश लेने में आनाकानी कर रहे हैं। बहरहाल यदि कटंगी के कुछ बच्चों को मॉडल स्कूल बैहर या उत्कृष्ट बालाघाट में प्रवेश मिल भी जाता है, तो वह प्रतिदिन 50 से 110 किमी. की दूरी तय करने में सक्षम नहीं है।
हाईस्कूल की कमी-
कटंगी में अतिरिक्त हाईस्कूल की कमी है। दरअसल, शासकीय कन्या उमावि तथा उत्कृष्ट विद्यालय में अधिकांश कैचमेंट शालाओं के विद्यार्थियों को ही प्रवेश मिल पाता है। ऐसे में अन्य प्राईवेट तथा सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी प्रवेश पाने के लिए हर साल इन स्कूलों के चक्कर काटते हैं। ऐसा नहीं है कि इस समस्या को लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, मंत्री एवं प्रशासन के वरिष्ट अधिकारियों को शिकायत या निवेदन नहीं किया गया है। लेकिन दुर्भाग्य है की अब तक इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। इस कारण हर साल बड़ी संख्या में गरीब बच्चे स्कूल छोडऩे को मजबूर है।
इनका कहना है।
राज्य सरकार सरकारी स्कूलों के लिए जो नीति बना रही है, वह सरासर गलत है। मगर, हकीकत तो यह है कि यहां तो शिक्षक भी ढंग से हिंदी नहीं जानते। सरकार को इस दिशा में सोचना चाहिए। वरना, बच्चे न हिंदी लायक रहेंगे और न अंग्रेजी लायक।
एलएल दुबे, सेवानिवृत्त प्रधानपाठक

उत्कृष्ट विद्यालय बालाघाट में अभी अंग्रेजी माध्यम में कितनी सीटें है स्पष्ट नहीं हो पाया है। वरिष्ट स्तर से जैसे निर्देशन प्राप्त होंगें। उसी आधार पर बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा।
राजेन्द्र लटारे, प्राचार्य उत्कृष्ट बालाघाट