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बालाघाट

डीएपी के नाम पर किसानों का थमाया सफेद पाउडर

किसानों ने नकली खाद् विक्रय किए जाने के लगाए आरोपसेवा सहकारी समिति कारंजा का मामला900 में 850 बोरियों का किया जा चुका है वितरणफसलों में नुकसानी होने की सता रही चिंता

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बालाघाट. डीएपी खाद् के नाम पर किसानों से धोखा किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में बकायदा किसानों ने खाद् में मिलावट होने के आरोप लगाते हुए खाद् की लैब में जांच करवाए जाने की मांग की। वहीं डीएपी के नाम पर सफेद पाउडर प्रदान कर उनसे ली गई राशि वापस किए जाने की मांग भी की है। पूरा मामला लांजी क्षेत्र के सेवा सहकारी समिति कारंजा है। नकली खाद की आशंका को लेकर समिति कर्मचारी भी सकते में नजर आ रहे हैं। वहीं कृषि विस्तार अधिकारी डीएपी का सेम्पल जांच के लिए लैब भिजवाने की बात कह रहे हैं।
यह है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार कारंजा सोसायटी में किसानों के लिए 900 बोरी एनएफएल कंपनी की डीएपी खाद् पहुंची थी। वहीं समिति से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक सोसायटी से 850 बोरियों का वितरण भी किसानों को सरकारी मूल्य 1315 रुपए प्रति बोरी के हिसाब से वितरण भी किया जा चुका है। किसान डीएपी खाद् काम नहीं करने और सफेद पाउडर की तरह होने का आरोप लगा रहे हैं। सोसायटी कर्मचारियों के अनुसार अभी कुछ ही किसानों ने इस तरह की आपत्ति जताई है। हालाकि डीएपी की जांच करवाई जा रही है।
इस तरह की आ रही समस्या
सोसायटी से डीएपी खाद क्रय करने वाले बापड़ी निवासी किसान रमेश नगपुरे ने बताया कि उसने 08 फरवरी को सोसायटी से एक बोरी डीएपी खाद खरीदी थी। जिसे उसने अपने 70 डिसमिल खेत में उपयोग की। लेकिन खाद् न तो पानी में घुल रही है, ना खेत की सतह पर बैठ रही है। रमेश ने बताया कि हवा आने पर पूरी डीएपी खाद उडकऱ खेतों की मेढ़ों जाकर जम गई है। इस कारण उसके खेत में लगे पौधों को फायदा नहीं मिल रहा और उसे फसल नुकसानी की आशंका सता रही है।
शिकायत पर पहुंचे अधिकारी
किसान रमेश नगपुरे ने बताया कि खेत में खाद् डालने के 12 से 13 दिन बाद भी फसल पर कोई असर नहीं हुआ। जबकि इतनी मात्रा में एक स्थान पर खाद् एकत्रित होने पर पौधा जल जाता है। लेकिन उसकी फसल पर कोई असर नहीं होना बताता है कि खाद डुप्लीकेट है। जिसकी जानकारी कृषि विभाग लांजी को दी गई। विभागीय अधिकारी मौका स्थल पर पहुंचे। जिन्होंने पंचनामा कार्रवाई कर सेवा समिति से जांच हेतु खाद का सैंपल लिया गया। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। खाद नकली है या असली इस बात का पटाक्षेप भी नहीं हो पाया है।
वर्सन
डीएपी खाद के नाम पर सफेद पाउडर देकर किसानों से धोखा किया गया है। खाद न पानी में घुल रही है ना खेत में बैठ रही है। ऐसे में पौधा कैसे ग्रोथ करेगा। सेम्पल लेने के बाद भी अब भी तक नहीं बताया गया है कि खाद असली है या नकली पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। वरिष्ठों को ध्यान देना चाहिए।
रमेश नगपुरे, किसान बापड़ी

कुछ किसान ने ही इस तरह की शिकायत की है। मौके पर पहुंचकर पंचनामा बनाकर सेम्पल एकत्रित किए गए हैं। लैब में जांच के लिए नमूने भेजे गए हैं। इसके बाद ही पता चल पाएगा की डीएपी खाद काम क्यो नहीं कर रहा या फिर उसमें मिलावट है या नहीं।
अमित नारनौरे, कृषि विस्तार अधिकारी