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चार नन्हें शावकों के साथ नजर आई गौरा बाघिन, पर्यटकों में उत्साह

वन्य प्राणियों के साथ ही अंग्रेजों के जमाने का रेस्ट हाउस, गणेश प्रतिमा और सागौन का पेड़ देखकर रोमांचित हो रहे पर्यटक

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वन्य प्राणियों के साथ ही अंग्रेजों के जमाने का रेस्ट हाउस, गणेश प्रतिमा और सागौन का पेड़ देखकर रोमांचित हो रहे पर्यटक

वन्य प्राणियों के साथ ही अंग्रेजों के जमाने का रेस्ट हाउस, गणेश प्रतिमा और सागौन का पेड़ देखकर रोमांचित हो रहे पर्यटक

जिले के दक्षिण सामान्य लालबर्रा का सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व मानसून के दौरान भी पर्यटकों से गुलजार नजर आ रहा है। बताया गया कि 17 जून को यहां की प्रसिद्ध गौरा बाघिन अपने चार नन्हें शावकों के साथ पर्यटकों को नजर आई थी। इसके बाद से ही यहां पर्यटकों की संख्या में इजाफा होना बताया जा रहा है। यहां पर्यटक वन्य प्राणियों के अलावा जंगल में अंग्रेजों के जमाने का रेस्ट हाउस, सागौन वन व प्राचीन गणेश प्रतिमा का दीदार कर भी रोमांचित हो रहे हैं।
बता दें कि सोनेवानी जंगल करीब कई हजार हेक्टेयर में विस्तृत रूप से फैला हुआ है। यहां पूरी तेरह बीटें हंै। यह जंगल कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के कारिडोर व सिवनी पेंच से लगे होने के चलते बाघ, तेंदुए, भालू, बायसन, चीतल, हिरण, नीलगाय समेत अन्य वन्यप्राणी अधिक संख्या में है। वर्ष 2015 राज्य सरकार ने इस जंगल को वन्यप्राणी अनुभव क्षेत्र घोषित किया है। वहीं 2025 में इसे कंजर्वेशन रिवर्ज घोषित किया गया है। एक अनुमान के अनुसार रोज करीब 30 पर्यटक सफारी कर रहे हैं। पर्यटकों के आने से नवेगांव, चिखलाबड्डी समेत आसपास के आदिवासी गांवों लोगों को गाइड के रूप में रोजगार भी प्राप्त हो रहा है।

शावकों के साथ दिखी बाघिन

बताया गया कि 17 जून को गौर बाघिन 4 शावकों के साथ पुरी सजगता से विचरन करते पाई गई। इस दृश्य को पर्यटकों ने अपने मोबाईल से वीडियो बनाया। यही बाघिन तालाब के किनारे अपने शावकों के साथ आराम करती भी पाई गई। इसके बाद वह उठकर अन्य स्थान पर चली गई। यहां भी पर्यटकों ने वीडिया बनाकर वायरल कर दिया।

वन्यजीव प्रेमी ने मनाई खुशियां

वायरल हुए 1 मिनट 21 सेकेंड तालाब का वीडियों एवं 16 सेकेंड के पगडंडी में विचरण करते हुए वीडियों ने वन एवं वन्यजीव प्रेमियों में खलबली मचा दी है। बाघिन गौरा सहित शावकों को देखने बड़ी संख्या में पर्यटक सोनेवानी जंगल पहुंच रहे हैं। हालाकि अधिकांश पर्यटकों ने गौरा बाघिन को तो देखा, लेकिन शावक सहित बाघिन को देखने का कुछ पर्यटकों को ही सौभाग्य मिला।

अंग्रेजों के जमाने का रेस्ट हाउस

वन्य प्राणी संरक्षण समिति सदस्य सिकंदर मिश्रा और असफाक खान के अनुसार जंगल के बीचों-बीच अंग्रेजों के शासनकाल में बनाया हुआ रेस्ट हाउस भी है। यही शासन काल में सागौन वन का प्लांटेशन भी हुआ है, जिसमें बड़े-बड़े हरे भरे ऊंचाई वाले पेड़ हो गए हंै। इतना ही नहीं एक सागौन का इतना बड़ा पेड़ है कि उसका करीब सात साल पूर्व प्रदेश में पेड़ों की गणना में तीसरा स्थान लगा था। साथ ही यहां प्राचीन गणेश मंदिर भी है। पर्यटक इन्हें भी खूब पसंद करते हैं।

एलर्ट मोड में वन विभाग

बाधिन अपने 4 शावकों के साथ सोनेवानी वन में दिखाई देने की जानकारी वन विभाग को लगी, लालबर्रा परिक्षत्राधिकारी एवं वारासिवनी परिक्षेत्राधिकारी अपने वन अमले को एलर्ट कर दिया है। जगह-जगह कैमरे एवं चेतावनी बोर्ड लगाए जाने लगे हैं। गश्ती बढ़ा दी गई है। साथ पर्यटक जिप्सी संचालकों एवं गाइड के लिए निर्देश जारी किए गए हंै कि पर्यटकों वन्यप्राणियों से निर्धारित दूरी बनाए रखे।

ऐसे पहुंचते हैं सोनेवानी

सोनेवानी में आने वाले महाराष्ट्र राज्य के पर्यटक गोंदिया जिला होते हुए ट्रेन या बस के माध्यम से बालाघाट मुख्यालय आते हंै। यहां से फिर वे बस या निजी वाहन से लालबर्रा तक पहुंचते हैं। इसके बाद सफारी करने जाते हंै। इसी तरह कुछ पर्यटक तुमसर भंडारा जिले से सीधे खैरलांजी, वारासिवनी होकर लालबर्रा आते हंै और फिर वहां से बस व अन्य माध्यम से जंगल तक जाते हंै। भोपाल, इंदोर, जबलपुर के पर्यटकों के लिए भी रेल्वे, बस सहित अन्य माध्यम उपलब्ध है।