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हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की

घर-घर पूजे गए भगवान श्री कृष्ण, पूरी रात गूंजे कृष्ण के जयकारेंश्रद्धालुओं ने भजन कीर्तन कर किया रतजगा

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हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की

हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की

बालाघाट. भादों मास की अष्टमी 19 अगस्त को भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ भक्तिमय माहौल में मनाया गया। श्रद्धालुओं ने घर-घर लड्डू गोपाल भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा अर्चना की। श्री कृष्ण के जयघोष व भजन कीर्तन कर रतजगा किया गया। दो वर्ष से कोरोना संक्रमण काल होने से कार्यक्रम नहीं किए गए थे। इस कारण इस बार जन्माष्टी का पर्व जिलेभर में धूमधाम से मनाया गया। पुराने श्रीराम मंदिर, कृष्ण मंदिर में रात्रि कालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए। वहीं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने घरों में अपने इष्ट देवता की खूब अगवानी की और जन्मोत्सव मनाया।
जन्माष्टमी पर्व को लेकर गुरूवार के साथ ही शुक्रवार को भी बाजार में काफी चहल-पहल रही। भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा व पूजन सामग्री की दुकानें सजी रही। मूर्तिकारों के घर भी प्रतिमा लेने वालों की सुबह से ही आवा-जाही रही। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर लाई चना का महत्व रहता है। इससे लाई चना फोडऩे वालों के घर भी ग्राहकों की भीड़ रही। इसके अलावा बांस से बना पारणा व फल सहित पूजन सामग्री की बिक्री भी अधिक हुई।
मंदिरों में मनाया जन्मोत्सव
कृष्णा जन्माष्टमी को लेकर नगर मुख्यालय के गुजरी स्थित भगवान श्रीकृष्ण मंदिर व राममंदिर की आकर्षक सजावट की गई। यहां सुबह से राधा कृष्ण की प्रतिमा का श्रंगार कर विविधि धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। वहीं
भजन कीर्तन का दौर भी रात भर चला।
मूर्ति विसर्जन आज
कृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन 20 अगस्त को शहर के प्रमुख नदी तालाबों में श्रीकृष्ण की मूर्ति का विसर्जन किया जाएगा। इन स्थानों पर प्रशासन द्वारा विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि कोई अप्रिय घटना घटित न हो। वहीं गोंविदाओं की टोलियों में इस बार खासा उत्साह नजर आ रहा है। जिनके द्वारा डीजे की धुन पर मटकी फोड़ का आयोजन किया जा रहा है। शहर भर में मटकियां बांधने का क्रम शुरू कर दिया गया है। 20 अगस्त को दोपहर मे गोंविदाओं की टोली नाचते गाते निकलेगी, वहीं इनके पीछे प्रतिमा विसर्जन का सिलसिला शुरू हो जाएगा।