
मनरेगा बनी प्रवासी मजदूरों का सहारा
बालाघाट. कोरोना महामारी के संकट काल में अन्य राज्यों व शहरों से अपने घर लौटे प्रवासी मजदूरों के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण योजना बड़ा सहारा बन रही है। इस महामारी के संकट काल में यह योजना ग्रामीणों व प्रवासी मजदूरों को न सिर्फ रोजगार देने में सफल हो रही है। बल्कि उन्हें रोजी रोटी देने के साथ ही उन्हें आर्थिक मजबूती प्रदान करने और उनके जीने का सहारा बन रही है। बालाघाट जिले के ग्राम भालवा में वापस पहुंची प्रवासी मजदूर प्रियंका मानेश्वर और उसकी साथी महिलाएंं इस योजना में काम पाकर बहुत खुश है।
जिले के किरनापुर विकासखंड के ग्राम भालवा की निवासी प्रियंका मानेश्वर, प्रिंयका पांचे और सरस्वती पांचे गांव में रोजगार का साधन नहीं होने और घर की आर्थिक स्थिति खराब होने से त्रिपुरा राज्य की कपड़ा कंपनी में कार्य करने चली गई थी। वे वहां पर कंपनी के कपड़ा कटिंग डिपार्टमेंट में कार्य करती थी। कोरोना संकट के दौरान घोषित किए गए लॉकडाउन में वे अपने घर वापस गई है। घर वापस आने पर उनकी आर्थिक स्थिति फिर से खराब होने लगी थी। ऐसे में मनरेगा योजना से गांव में चालू हुए नहर सुधार कार्य ने उन्हें सहारा दिया। प्रियंका मानेश्वर, प्रिंयका पांचे और सरस्वती पांचे बताती है कि उनकी भालवा पंचायत में मनरेगा योजना के अंतर्गत काम शुरू हुए है तो वे बहुत खुश हुई और उन्हें उम्मीद की किरण नजर आई। उन्होंने मनरेगा में कार्य करना चालू किया तो उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार भी आया है और अब हम अपने गांव में ही अपनों के साथ रहकर नहर के सुधार कार्य में जुट गए हैं। हमें अब अच्छी मजदूरी भी मिल ही रही है और परिवार की रोजी-रोटी भी अच्छे से चल रही है। मनरेगा में मिल रही 190 रुपए प्रतिदिन की मजदूरी से वे कुछ बचत भी कर ले रही है। मनरेगा में मिल रहे कार्य से वे बहुत खुश है और कहती हैं किए उनके गांव में ही रोजगार मिलेगा तो दोबारा त्रिपुरा नहीं जाएंगे।
Published on:
17 Jun 2020 07:57 pm
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