
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्रामीण अंचलों में केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि आत्म निर्भरता और सम्मान जनक आजीविका का माध्यम भी बन रही है। जिले की लालबर्रा जनपद की ग्राम पंचायत बहेगांव में मनरेगा एवं 15वें वित्त आयोग के अभिसरण से निर्मित निषादराज भवन इसका सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है। लगभग 200 मछुआरों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाया है।
बहेगांव की मछुआरा सहकारी समिति से जुड़े लगभग 200 मछुआरे पंचायत क्षेत्र के करीब 6 शासकीय तालाबों में मत्स्य पालन कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। पहले मछली पकडऩे के बाद उन्हें सुरक्षित रखने के लिए किसी उपयुक्त स्थान की व्यवस्था नहीं थी। मजबूरी में खुले में रखी मछलियां जल्दी खराब हो जाती थीं, मछुआरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था, उनकी मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत के माध्यम से वर्ष 2022-23 में मनरेगा एवं 15वें वित्त आयोग के अभिसरण से 2.77 लाख की लागत से निषादराज भवन का निर्माण कराया गया। इस भवन के बन जाने से मछुआरों को मछली संग्रहण के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध हो गया है।
मछुआरे पकड़ी गई मछलियों को निषादराज भवन में सुरक्षित रखकर अगले दिन बेहतर दरों पर बाजार में विक्रय कर पा रहे हैं। इससे न केवल मछलियों की बर्बादी रुकी है, बल्कि मछुआरों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बढ़ी हुई आमदनी से वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रहे हैं और बच्चों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर भी अधिक ध्यान दे पा रहे हैं।
ग्रामीणों और मछुआरा समुदाय ने इस पहल को मनरेगा योजना की लाभकारी योजना बताया है। निषादराज भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि 200 मछुआरों के लिए आत्म निर्भरता, सम्मान और सुरक्षित भविष्य का प्रतीक बन चुका है। वास्तव में मनरेगा योजना ग्राम पंचायत बहेगांव के मछुआरों के लिए वरदान सिद्ध हुई है, जिसने उनकी मेहनत को सही दिशा और स्थायित्व प्रदान किया है।
Published on:
04 Jan 2026 04:23 pm
बड़ी खबरें
View Allबालाघाट
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
