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आठ साल में रोपित किए 25 हजार से अधिक पौधे, 90 प्रतिशत जीवित-

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष- पौध रोपण से लेकर बड़े होने तक बच्चों की तरह करते हंै देखभाल घर में नर्सरी खोल बीज से तैयार कर रहे पौधे शिक्षक, डॉक्टर, व्यापारी से लेकर हर वर्ग और क्षेत्र के लोग कर रहे सेवा

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पौध रोपण के क्षेत्र में कारगर साबित हो रहे कदम संस्था के प्रयास

पौध रोपण के क्षेत्र में कारगर साबित हो रहे कदम संस्था के प्रयास

पौधारोपण हम करें, हो प्राणी कल्याण। प्रकृति रूप में हम करें, ईश्वर का सम्मान।। इन लाइनों को चरितार्थ करने का काम शहर में कदम संस्था कर रही है। अक्टूबर 2017 से कदम मित्र शहर सहित आस पास के गांव में पौध रोपण करने का कार्य कर रहे हैं। कदम मित्र डॉक्टर अर्चना शुक्ला के अनुसार अब तक संस्था के माध्यम से करीब 25 हजार से अधिक पौधे रोपित किए जा चुके हैं। खास यह है कि 90 प्रतिशत पौधे अब भी जीवित है। पेड़ बनकर प्राण वायु देने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण में अपनी अमूल्य भूमिका निभा रहे हैं।

2017 से शुरू हुआ कारवां

पत्रिका से चर्चा में डॉ अर्चना शुल्का ने बताया कि कदम संस्था की शुरूआत जबलपुर जिले से हुई है। अक्टूबर 2017 में एक एमआर के माध्यम से संस्था की जानकारी लगी। तब 11 सौ रुपए की सेवा शुल्क देकर संस्था के आजीवन सदस्य बनाए गए। कदम मित्रों के इमानदारी पूर्वक प्रयास और परिणाम से प्रेरित होकर प्रबुद्धजन जुड़ते चले गए। वर्तमान में संस्था के करीब 248 आजीवन सदस्य है। इनमें 62 से 65 सदस्य सक्रिय रूप से निष्ठा पूर्वक अपनी जवाबदारी का निर्वहन कर रहे हैं।

हर वर्ग के लोगों की सहभागिता

कदम संस्था में केवल चिकित्सक ही नहीं बल्कि हर वर्ग और क्षेत्र के लोग सेवा दे रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से जिले के प्रसिद्ध चिकित्सक, प्रतिष्ठित व्यापारी, एमआर, उद्योगपति आदि शामिल है। सभी पूरी इमानदारी और निष्ठा पूर्वक अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पिछले 8 वर्षो से करते आ रहे हैं। इनकी पौधों के प्रति निष्ठा और स्नेह की हर कोई प्रशंसा भी करता है।

घर पर बनाई नर्सरी

हर तरह के आवश्यक पौधे शहर में मुहैया हो सकें इसके लिए कुछ सदस्यों ने घर पर ही नर्सरी भी तैयार की है। डॉ शुल्का के अनुसार कदम मित्र डॉ अर्चना अभय लोकरे, डॉ भारमल सहित अन्य सदस्य ऐसे हैं, जिन्होंने अपने ही घर पर पौधों की नर्सरी बनाई है। यहां बीज से पौधे तैयार किए जाते हैं। जिन्हें हर रविवार को चयनित स्थान पर रोपित किए जाते हैं।

सामने आ रहे सुखद परिणाम

डॉ शुक्ला के अनुसार उनकी संस्था में पुराने वृक्षों को पूर्वज तथा नए पौधों को पुत्र के समान स्नेह देने वालों की कमी नहीं है। सभी सदस्य एक परिवार के रूप में काम कर रहे हैं। संस्था के पौध रोपण के सुखद परिणाम भी शहर के पॉलीटेक्निक कॉलेज के सामने और सीआरपीएफ परिसर में देखने को मिलते हैं। यहां बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए थे। अब पौधे पेड़ बन गए हैं। पूरा परिसर हरियाली से भर गया है।
वर्सन
आदि काल से ही पौध रोपण भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है। हमारे पूर्वजों ने प्राकृतिक रूप से कई लाभकारी वृक्षों को पूजनीय बनाया। वृक्ष लगाने वाले न केवल वर्तमान को दिशा देते हैं बल्कि भविष्य को संवारने का कार्य भी करते हैं। प्रत्येक लोगों को अपने जीवनकाल में पौधे लगाने चाहिए और उनके बड़े होने तक सेवा करनी चाहिए।
डॉ अर्चना शुक्ला, कदम मित्र व स्त्री रोग विशेषज्ञ