
आस्था और हर्षोल्लास से मनाया गया मकर संक्रांति पर्व
संक्रांति के दिन बुधवार को शहर के वैनगंगा नदी के घाटों व मंदिरों में सुबह से श्रृद्धालुओं का तांता लगा रहा। हजारों लोगों नें सूर्य को जल और तिल का अध्र्य देकर मंगल कामना की। सूर्य उपसना का पर्व मकर संक्रांति इस वर्ष भी परंपरागत रूप से आस्था पूर्वक मनाया गया।
बदलते वक्त के साथ मकर संक्रांति पर्व पर पिकनिक की प्रथा भी चली आ रही है। बुधवार को लोगों ने पूजन-अर्चन के बाद परिवार और दोस्तों के साथ पिकनिक स्पॉट पर पिकनिक का लुफ्त उठाते नजर आए।
मकर संक्रांति पर्व पर तिल का विशेष महत्व होता है। किंतु मंहगाई में तिल के बढ़े दामों से अधिकांश महिलाओं ने सिर्फ पूजन के लिए तिल की खरीदी की। सुबह तिल और जल का अध्र्य देकर सूर्योपासना की गई। घरों में तिल के व्यंजन से अधिक मुर्रे, सोजी व मुंगफल्ली आदि के व्यंजन बनाती महिलाएं दिखाई दी।
मकर संक्रांति पर्व पर प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी गांगुलपारा, वनस्पति उद्यान सहित पावन सलिला वैनगंगा के शंकर घाट, बजरंगघाट, आमाघाट पर पिकनिक मनाने आए लोगों की खासी भीड़ रही। इन स्थलों पर मेले जैसी स्थित रही। लोग परिवार और दोस्तों के साथ यहां आकर पिकनिक मनाते नजर आएं। इन स्थलों पर चाट, पकोड़ा, गुपचुप, खिलौने सहित अन्य दुकानें भी लगाई गई। पिकनिक को लेकर बुजुर्गो में भी काफी उत्साह नजर आया। वनस्पति उद्यान में भी मेला सी स्थिति रही। यहां महिलाए और युवतियां ने जल क्रीड़ा करतीं भी नजर आईं।
शहर के शंकरघाट, बजरंगघाट व वनस्पति उद्यान के पीछे नदी की तरफ में मेले की स्थिति में पुलिस व्यवस्था भी मुस्तैद रही। यहां लाईफ जैकेट, किसी के डूबने पर बचाव के इंतजाम और अन्य सुरक्षा के इंतजाम पुलिस अधिकारियों द्वारा करवाए गए थे। इसके अलावा शहर के मुख्य चौक-चौराहों व भीड़-भाड़ वाले इलाकों पर पुलिस जवान मुस्तैद रहे।
नवेगांव निवासी पंडित राजेश दुबे के मुताबिक संक्रमण अर्थात घूमना यानि सूर्य के संक्रमण करते हुए मकर राशि में प्रवेश करने के कारण यह पर्व मकर संक्रांति कहलाता है। इस पर्व पर तिल के तेल से स्नान एवं तिल का सेंवन करना शुभ मना जाता है। इसी धार्मिक मान्यता के चलते श्रृद्धालु मकर संक्रांति पर तिल एवं गुड़ के लड्डु एवं अन्य व्यंजन तैयार कर उसका सेवन करते हंै।
Published on:
14 Jan 2026 07:54 pm
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