
बालाघाट. जिले के पठार अंचल में धान की फसल को पानी की आवश्यकता थी। 14 सितंबर से हुई बारिश ने पानी की कमी को पूरा कर दिया है। पानी की कमी से सूख रही फसल को संजीवनी मिल गई है। अब किसानों को अच्छा उत्पादन मिलने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार जिले के कटंगी क्षेत्र के पठार अंचल और खैरलांजी एरिया के कुछेक क्षेत्र में पानी की कमी से धान की फसल प्रभावित हो रही थी। किसान धान की फसल में सिंचाई करने के लिए नहरों से पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे थे। इसके लिए किसानों ने आंदोलन भी किया था। प्रशासन ने नहरों से पानी छोड़े जाने के लिए व्यवस्था बनाने का आश्वासन दिया था। इसी बीच आसमान से बारिश अमृत बनकर बरसी। इस बारिश से धान की फसल को संजीवनी मिली है। पानी की कमी से जूझ रहे किसानों ने राहत की सांस ली है। उल्लेखनीय है कि पानी की कमी से खैरलांजी क्षेत्र में करीब पांच सौ एकड़ और कटंगी के पठार अंचल में लगभग इतनी ही कृषि भूमि की फसल प्रभावित हो रही थी।
बेहतर फसल उत्पादन की उम्मीद
अब किसानों ने बेहतर फसल उत्पादन की संभावना जताई है। किसानों का कहना है कि हल्की प्रजाति की धान कुछेक स्थानों पर निकलने लगी है। जबकि कुछेक स्थानों पर गर्भ में है। ऐसे में फसल को पानी की आवश्यकता थी, जो 14 सितम्बर से हुई बारिश ने पूरी कर दी है। बारिश से न केवल पानी की कमी पूरी हुई है। बल्कि इससे उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ेगा।
औसत हुई बारिश
किसानों का कहना है कि पठार क्षेत्र में न ज्यादा न कम बारिश हुई है। बल्कि औसत बारिश हुई है। इससे धान की फसल को फायदा होगा। ग्रामीण दीपक पुष्पतोड़े, रमेश नगपुरे, निरंजन गोपाले, अरविंद देशमुख, नितेश पुष्पतोड़े, प्रमोद पुष्पतोड़े, निरंजन गोपाले सहित अन्य ने बताया कि इस बारिश से किसानों को फायदा ही होगा। हल्की प्रजाति की धान के लिए यह बारिश अमृत बनकर बरसी है। वैसे भी किसानों को सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता थी, जो अब पूरी हो गई है।
अन्नदाता को सलाह
उपसंचालक कृषि राजेश खोबरागड़े ने किसानों को सलाह दी है कि जिन किसानों के खेतों में पानी अधिक जमा हो गया है, उसके निकासी की व्यवस्था करें। खासतौर पर हल्की प्रजाति की धान जो डूब क्षेत्र में है, वहां से पानी को अलग-अलग कर दिया जाए। ताकि फसल को ज्यादा नुकसान न हो सकें। उपसंचालक का कहना है कि वैसे तो इस बारिश से फसल को नुकसान नहीं होगा। लेकिन खैरलांजी, लालबर्रा और बालाघाट विकासखंड में नदी किनारे के बाढग़्रस्त खेतों में फसल नुकसानी की संभावना बनी हुई है। हालांकि, बारिश थमने से इन क्षेत्रों का पानी भी कम होने लगा है।
एक्सपर्ट व्यू
जिन क्षेत्रों में बारिश कम हुई थी, उन क्षेत्रों में धान की फसल के लिए यह बारिश अमृत समान है। इस बारिश से धान को नुकसान नहीं होगा। बाढग़्रस्त क्षेत्र में पानी में डूबे रहने से फसल को नुकसान हो सकता है, लेकिन कटंगी, तिरोड़ी क्षेत्र में ऐसी स्थिति नहीं है। इन क्षेत्रों में किसानों को धान की फसल के लिए पानी की आवश्यकता थी, जो इस बारिश में पूरी हो गई है। इससे किसानों को अच्छा उत्पादन मिल सकता है।
-राजेश खोबरागड़े, उपसंचालक कृषि
Published on:
17 Sept 2023 09:57 pm
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