
सभी वेदों का सार संग्रह है श्रीमद् भागवत गीता
बालाघाट/नेवरगांव. समीपस्थ ग्राम पिपरिया बडग़ांव के शिव मंदिर प्रांगण में शुक्रवार से संगीतमय श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सत्संग समागम कथा व्यास महाराज भुवन कृष्ण दुबे के नेतृत्व में यज्ञशाला में प्रवेश पूजन एवं भागवत कथा आरंभ की गई। इस दौरान वामेंद्र पटले और उनकी धर्मपत्नी निशा पटले द्वारा श्रीमद् भागवत पुराण की पूजा अर्चना की गई।
भागवत कथा व्यास महाराज भुवन कृष्ण दुबे ने भागवत कथा का विस्तृत विवरण धार्मिक महत्ता पूजा की समस्त विधियां भक्तों को बताई। श्रीमद् भागवत का वर्णन करने के लिए वाणी द्वारा किसी में भी सामर्थ नहीं है। यह एक परम रहस्य ग्रंथ है इसमें सम्पूर्ण वेदों का सार संग्रह किया गया है। इसकी संस्कृत इतनी सुंदर और सरल है कि थोड़ा अभ्यास करने से मनुष्य उसको सहज ही समझ सकता है। परंतु इसका आशय इतना गंभीर है कि आजीवन निरंतर अभ्यास करते रहने पर भी उसका अंत नहीं आता। प्रतिदिन नए-नए भाव उत्पन्न होते रहते हैं इससे यह सदैव नवीन बना रहता है। हम एकाग्र चित्त होकर श्रद्धा भक्ति सहित विचार करने से इसके पग-पग में परम रस भरा हुआ प्रतीत होता है। भगवान के प्रभाव और मर्म का वर्णन जिस प्रकार इस शास्त्र में किया गया है वैसा अन्य ग्रंथों में मिलना कठिन है। कल्याण की इच्छा वाले मनुष्य के लिए उचित है कि मुंह का त्याग कर अतिशय श्रद्धा भक्ति पूर्वक अपने बालकों को अर्थ और भाव के सहित गीता का अध्ययन कराएं एवं स्वयं भी इसका पठन और मनन करते हुए भगवान की आज्ञा अनुसार साधन करने में तत्पर हो जाएं। अति दुर्लभ मनुष्य शरीर को प्राप्त होकर अपने अमूल्य समय का एक क्षण भी दुख मूलक क्षणभंगुर भोंगों के भोगने में नष्ट करना उचित नहीं है। भागवत ज्ञान यज्ञ में संस्कृत पारायण ध्रुप देव मिश्रा, दीनदयाल मिश्रा सत्संग में अपना योगदान दे रहे हैं।
Published on:
22 Feb 2019 07:34 pm
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