
चिन्नौर में मिलावट व नकली उत्पाद पर होगी सख्त कार्रवाई
बालाघाट. जिले की प्रसिद्ध चिन्नौर धान, चावल को जीआई टैग मिलने के बाद इससे जुड़े उत्पादों का मिथ्या प्रचार व भ्रामक दावे कर व्यवसाय करने एवं नकली उत्पाद का बालाघाट चिन्नौर के नाम से विक्रय करने की संभावना को देखते हुए कलेक्टर डॉ गिरीश कुमार मिश्रा ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हंै। जिनका उल्लंघन करने पर दोषी व्यक्ति को दंड दिया जाएगा, जो की केद भी हो सकता है।
उल्लेखनीय है पत्रिका समाचार पत्र द्वारा समय-समय पर चिन्नौर चावल को पहचान दिलाए जाने, जीआई टैग के साथ ही इसमें की जाने वाली मिलावट का अंदेशा भी अपनी खबरों में जाहिर किया था। पत्रिका ने अपने ११ नवंबर के अंक में चिन्नौर के नाम पर छल, उत्पादन से अधिक बाजार में बिक रहा चिन्नौर शीर्षक से खबर का प्रमुखता से प्रकाशन किया है। इसके बाद इस तरह के आदेश जारी किए गए हैं।
यह जारी किए गए आदेश
इस संबंध में जारी आदेश में कहा गया है कि वस्तुकओं के भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री करण तथा संरक्षण अधिनियम 1999 की धारा 16-2 के अधीन भौगोलिक उपदर्शन अथवा प्राधिकृत उपयोक्ता के रजिस्ट्रीकरण का प्रमाण पत्र क्रमांक 663 द्वारा बालाघाट चिन्नौर चांवल, धान को 14 सितंबर 2021 को रजिस्ट्री कृत किया गया है। इस अधिनियम की धारा 40 के अंतर्गत भौगोलिक उपदर्शन अर्थात जिले के बालाघाट चिन्नौर धान, चावल से संबंधित वस्तुओं के प्रदर्शन में भौगोलिक संकेतक का ऐसा उपयोग, जो इस प्रकार यह बतलाता है या संकेत करता है कि ऐसी वस्तु अपने वास्तविक उत्पत्ति स्थोल से इतर किसी अन्य भौगोलिक क्षेत्र में पैदा होते हैं, जिससे ऐसे वस्तुओं की भौगोलिक उत्पत्ती के बारे में लोग भ्रमित होते हैं, प्रतिबंधित रहेगा।
भौगोलिक संकेतक का ऐसा उपयोग जो अनुचित प्रतिस्पर्धा का कार्य हो, तात्पर्य यह कि औद्योगिक एवं वाणिज्यिक क्रियाकलापों में इमानदार कार्यप्रणाली के विपरीत हो। अपंजीकृत वस्तुेओं का पंजीकृत भौगोलिक संकेतक वस्तुव के रूप में प्रकटन। ऐसे सभी कार्य जो अधिकृत उपयोगकर्ता के उद्यम वस्तुओं या औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों के प्रति भ्रम पैदा करते हैं। इस प्रकार की व्यापारिक प्रक्रिया पर मिथ्यां आरोप जो अधिकृत उपयोगकर्ता के उद्यम, वस्तु या औद्योगिक या वाणिज्यिक गतिविधियों को बदनाम करते हों। भौगोलिक संकेतकों का ऐसा उपयोग जो व्यक्तियों को वस्तुओं की प्रकृति, निर्माण प्रक्रिया, उद्देश्यों की उपयुक्त या परिणाम के बारे में भ्रमित करता है। वस्तुओं के लिए किसी दूसरे भौगोलिक संकेतक का उपयोग, जो यद्यपि अपने क्षेत्र या स्थान या सीमा जहां वस्तु का उत्पादन होता है के लिए वास्तविक होते हैं। परन्तु उपभोक्ताओं को मिथ्या रूप से प्रदर्शित करते हंै कि इनका उत्पादन उस क्षेत्र स्थान या सीमा में होता है, जो पंजीकृत भौगोलिक संकेतक से संबद्ध हैं, प्रतिबंधित रहेगा।
उक्त किसी भी क्रियाओं को किए जाने में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यतक्ष रूप से शामिल होने पर संबंधित व्यक्ति, संस्था के विरुद्ध उक्त अधिनियम की धारा 41 में प्रावधानित दंड का निर्धारण किया गया है, जो की कैद है। अत: भौगोलिक उपदर्शन अर्थात बालाघाट चिन्नौर में ऐसी क्रियाएं पाए जाने पर उक्त नियम की धारा 41 के अनुसार कार्रवाई किया जाना सुनिश्चित किया जाएगा।
Published on:
11 Nov 2021 07:57 pm
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