
बाघ के शिकार के आरोप में दो माह बाद 6 शिकारी गिरफ्तार
दो माह की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार वन विकास निगम के अधिकारियों ने बाघ के शिकारियों को पकडऩे में सफलता हासिल की है। इस मामले में ग्राम बोदलकसा के 6 आरोपियोंं को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के पास से वन अमले ने बाघ के शिकार में प्रयुक्त जीआइ तार, बांस की खूंटी, रस्सी सहित अन्य सामग्री जब्त की है।
बालाघाट/वारासिवनी. दो माह की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार वन विकास निगम के अधिकारियों ने बाघ के शिकारियों को पकडऩे में सफलता हासिल की है। इस मामले में ग्राम बोदलकसा के 6 आरोपियोंं को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में छन्नूलाल पिता फकीरचंद मात्रे (38), रमेश पिता पेंढारी पंजरे (42), राजकुमार पिता चेतनलाल हरदे (35), बसंत पिता श्यामजी पंचेश्वर (38), महेश पिता मोहनलाल बिसेन (38) और लेखचंद पिता रज्जलाल बिसेन (53) शामिल है। आरोपियों के पास से वन अमले ने बाघ के शिकार में प्रयुक्त जीआइ तार, बांस की खूंटी, रस्सी सहित अन्य सामग्री जब्त की है। इन आरोपियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 (यथा संशोधित वन्य जीव संरक्षण संशोधन अधिनियम 2022) की धारा 2, 9, 39 के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों को शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया गया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
जानकारी के अनुसार 17 मार्च 2024 को ग्राम पंचायत सावंगी के ग्राम तुमड़ीटोला के पास चंदन नदी में एक बाघ का शव मिला था। बाघ का शिकार कर उसके अवशेष निकालकर शव को नदी में फेंक दिया गया था। सूचना मिलने पर अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुंचकर शव को बरामद करने की कार्रवाई की थी। बाघ का शव मिलने के बाद वन विभाग बालाघाट व जबलपुर के अधिकारियों ने मामले की जांच की। आरोपियों की लगातार तलाश की। ग्राम बोदलकसा, तुमड़ीटोला, सावंगी, खापा, खंडवा के कई ग्रामीणों से पूछताछ की गई थी। लेकिन बाघ के शिकारियों का कोई पता वन विभाग के अधिकारी नहीं लगा पाए थे। इसके बाद विभाग ने गोपनीय तरीके से ग्रामीण क्षेत्रों की चाय, पान की दुकानों में बैठकर मामले की जांच शुरु की।
सूचना के आधार पर ग्राम बोदलकसा के 2 ग्रामीणों पर अपना शिकंजा कसा। दो ग्रामीणों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की। उन्होंने बाघ के शिकार के बाद उसे ठिकाने लगाने में सहयोग करने वालों के बारे में जानकारी दी। पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि महेश बिसेन ने अपने खेत के चारों तरफ जीआइ तार को खूंटी के माध्यम से गाड़ कर उसमें करंट प्रवाहित कर दिया था। उसके खेत में पानी भरा हुआ था और उसके खेत के पास से एक बरसाती नाला बहता है। वन्य प्राणी बाघ इस क्षेत्र में घूमते हुए महेश बिसेन की खेत की ओर चले गया और तारों में प्रवाहित करंट की चपेट में आकर 11 मार्च को उसकी मौत हो गई। 12 मार्च की सुबह महेश बिसेन ने जब बाघ को खेत की मेढ़ पर मरा हुआ देखा, तो उसने बसंत, लेखचंद/अब्बास, महेश, रमेश को बुलाकर लाया। रस्सी की सहायता से मृत बाघ को 200 मीटर तक घसीट कर चनई नदी में गहरी डोह में दबा दिया। 15 मार्च को महेश बिसेन ने छन्नू व राजकुमार को लेकर डोह के पास पहुंचे। जहां मृत बाघ के नाखून निकाल कर आपस में बंटवारा कर लिया। फिर महेश ने मृत बाघ को नदी की ओर तेज बहाव में धकेल दिया। लेकिन बारिश व नदी की तेज धार के साथ बहते हुए वह ग्राम तुमडीटोला तक पहुंच गया था।
इनका कहना है
बाघ के शिकारियों का पता करने के लिए अन्य स्थानों के व्यक्तियों का सहारा लिया गया। जिसके बाद आरोपियों का पता चला। 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है। इन्हें रिमांड पर लेकर मृत बाघ के नाखून व दांतों के बारे में जानकारी ली जाएगी।
-बीआर सिरसाम, एसडीओ वन विभाग कटंगी
Published on:
18 May 2024 09:40 pm
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