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बाघ नदी सूखी, जल संकट गहराया

 क्षेत्र में दो राज्यों मप्र एवं महाराष्ट्र की सीमा को दर्शाने वाली वाली बाघ नदी वर्तमान में सूख चुकी है। इस कारण समीपवर्ती ग्रामों में जलसंकट गहरा गया है एवं नदी के किनारे खेती करने वाले दोनों राज्यों के किसान अपनी फसल को बचाने नदी में कुएं खोदकर सिंचाई कर अपनी फसल बचा रहे हं।

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Mukesh Yadav

Apr 19, 2016

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बालाघाट।
क्षेत्र में दो राज्यों मप्र एवं महाराष्ट्र की सीमा को दर्शाने वाली वाली बाघ नदी वर्तमान में सूख चुकी है। इस कारण समीपवर्ती ग्रामों में जलसंकट गहरा गया है एवं नदी के किनारे खेती करने वाले दोनों राज्यों के किसान अपनी फसल को बचाने नदी में कुएं खोदकर सिंचाई कर अपनी फसल बचा रहे हं।

जानकारी के अनुसार अल्प वर्षा के कारण क्षेत्र कके समस्त जल स्त्रोत सूख चुके हैं और इस वर्ष सूखे जैसे हालात बने हुए हंै। क्षेत्र के कुएं, नलकूप का जल स्तर कम हो जाने के चलते आमजन पेयजल के लिए यहां वहां भटक रहे हंै। जिनकी निगाहे अब छोटी बाघ नदी में बनाए गए बांघ से पानी छोड़े जाने की मांग की जा रही है।

सूखने की कगार फसलें

क्षेत्र के अंतिम छोर पर बहने वाली बाघ नदी और इसके भीतर बने हुए कूपों के भी इस वर्ष बुरे हाल है। आलम यह है कि पीने के पानी की व्यवस्था बड़े मुश्किल से हो रही है। दूसरी ओर नदी की सूखी तस्वीर को देखकर किसानों की चिंता बढ़ रही है। किसानों ने बड़ी उम्मीद से नदी के किनारे विभिन्न प्रकार की फसलें लगाई थी, जो पानी के अभाव में नष्ट होने की कगार पर है।

दो राज्यों के किसान आश्रित

कुलपा, परसोड़ी, बापड़ी के ग्रामीणों के अनुसार मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र राज्य सीमा के मध्य बाघ नदी है तथा इस नदी पर दोनों ही राज्यों के दर्जनों ग्राम के सैकड़ों किसान गर्मी के मौसम में आश्रित रहते हैं। इस वर्ष बारिश नहीं होने के कारण नदी किनारे बसे गांवों में पानी के समस्त जल स्त्रोत सूख चुके हैं, इस कारण किसानों के समक्ष फसल सिंचाई की विकराल समस्या खड़ी हो गई है।

तो नहीं गहराता जल संकट

जानकारी के अनुसार बाघ नदी के उपर सिरपुर व पुजारीटोला बांध है। उक्त बांध से नदी में पानी छोड़ा जाना था, जिससे किसानों एवं वन्य प्राणियों, जीव जन्तुओं की परेशानी दूर हो सकती है। लेकिन सिंचाई विभाग द्वारा रबी फसल के लिए बेसमय नहर से महीनों तक पानी छोड़ा गया है। ग्रामीणों की माने तो कारंजा की छोटी बाघ नदी के किनारे लगे किसानों से सिंचाई हेतु एग्रीमेंट के नाम पर पैसा लेकर 4 से 5 बार सिंचाई के लिए नहर के माध्यम से छोटी बाघ नदी में पानी छोड़कर पानी का दुरूपयोग किया गया है। उक्त पानी मप्र -महाराष्ट्र सीमा की बड़ी बाघ नदी पर छोड़ा जाता, तो किसानों की फसलों के साथ ही जल संकट इतना गंभीर नहीं गहराता।

फसल बचाने जोर लगा रहे किसान

उक्त नदी के किनारे के किसान अपनी फसल बचाने के लिए एड़ी चोटी लगाते हुए सूखी नदी के अन्दर एक से अनेक जगहों पर कुएं खोंदकर पानी निकालकर अपनी फसलें बचाने में लगे हुए हंै। नदी के किनारे बसे दर्जनों ग्रामों के ग्रामीणों एवं किसानों ने मांग की कि पुजारीटोला (कोटरा) डेम एवं सिरपुर डेम से नदी में पानी छोड़ा जावें, जिससे कुंए, नलकूपों का जल उंचा उठने के साथ ही किसानों एवं वन्य प्राणियों का भी जल संकट दूर होगा।

वर्जन

हम इस बारे में अधिकारियों से जानकारी ली है। लेंगे यदि बाघ से पानी छोडऩे पर समस्या का निराकरा होता है तो जानकारी के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

भरत यादव, कलेक्टर