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शहादत को सलाम: दौसा के शहीद सूबेदार भूप सिंह गुर्जर, परिवार ने अपने खर्चे से बनवाया स्मारक, आश्वासन के बाद भी मदद नहीं

Shahadat Ko Salam: दौसा जिले के महुवा निवासी शहीद सूबेदार भूप सिंह गुर्जर की शहादत आज भी प्रेरणा है। 27 अप्रैल 2017 को कुपवाड़ा में आतंकी हमले में उन्होंने दो आतंकियों को मार गिराया। पुत्र सेना में हैं। वादे पूरे न होने पर परिवार ने स्वयं स्मारक बनवाया। राजस्थान पत्रिका ने परिवार को सम्मानित किया।

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दौसा

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Arvind Rao

Jan 20, 2026

Shahadat Ko Salam

राजस्थान पत्रिका की ओर से किया सम्मान (फोटो- पत्रिका)

Shahadat Ko Salam: दौसा: मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले महुवा के खेड़ला बुजुर्ग निवासी शहीद सूबेदार भूप सिंह गुर्जर की शहादत आज भी लोगों के दिलों में अमर है। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में 27 अप्रैल 2017 की सुबह 4 बजे आतंकियों ने सेना के बेस कैंप पर हमला किया था। उसमें भूप सिंह ने अंतिम सांस तक लड़ते हुए दो आतंकियों को मार गिराया।

यह बताते हुए आज भी उनके परिजन भावुक हो जाते हैं, लेकिन भूप सिंह की शहादत पर गर्व भी है। उनके छोटे बेटे विश्वेंद्र सिंह भी सेना में सेवा दे रहे हैं। बड़े बेटे पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि शहादत के बाद कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी और सहायता का आश्वासन दिया, लेकिन वादे पूरे नहीं हुए। अंततः उन्होंने स्वयं के खर्चे पर पिता का स्मारक बनवाया।

राष्ट्रपति ने भी किया था सम्मानित

1971 में जन्मे भूप सिंह बचपन से ही पढ़ाई के साथ खेत में पिता का हाथ बंटाते थे, लेकिन देशभक्ति का जज्बा उनकी रगों में दौड़ता रहा। 12वीं पास करने के बाद उन्होंने 1992 में भोपाल से भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा का मार्ग चुना।

सैन्य जीवन में वो कई बार आतंकवादियों से भिड़े और उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया। उनकी वीरता को देखते हुए शहादत से पूर्व तत्कालीन राष्ट्रपति ने भी उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मानित भी किया था।

पत्रिका की ओर से किया सम्मान

राजस्थान पत्रिका के शहादत को सलाम अभियान के तहत महुवा स्थित पत्रिका कार्यालय में वीरांगना रामादेवी और पुत्र पुष्पेंद्र सिंह का सम्मान किया गया। इस अवसर पर भामाशाह विनोद सिंह जादौन, पुलिस उपाधीक्षक मनोहर लाल मीणा, डॉ. नरसीराम और डॉ. कृपेश उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।