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वनवासी रामकथा का आयोजन ; भगवान के दरबार में चित्र नहीं चरित्र की होती है पूजा-पं. धीरेन्द्र शास्त्री

दिव्य दरबार का हुआ आयोजन, श्रद्धालुओं ने लगाई अर्जी, पीठाधीश्वर ने सुनी समस्याएं

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बालाघाट. जंगल में मंगल होता है, यह सुना था। लेकिन आज नजारा भी देख लिया। हम बाहर से सुंदर हो लेकिन चरित्र खराब हो, वह चरित्र किसी काम का नहीं है। भगवान के दरबार में चित्र नहीं चरित्र की पूजा होती है। हमारे दिल में हिंदुओं के प्रति आस्था है। भोले-भाले लोगों को प्रलोभन देकर सनातन धर्म से दूसरे पंथ में ले जाते है। लोग ऐसे भटके ने, इसलिए हिंदुओं को रोकने आए है। वन में कथा करने नहीं आए है। आप लोगों में भगवान राम की छवि दिखाई पड़ती है। आप अपना गौरव भूलना मत। वन में रहने वाले वनवासी, तुम उस वंश और खानदान के हो, जिन्होंने वनवास के दौरान भगवान राम का साथ दिया। एक बार फिर देश को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए तुम्हारी जरुरत है। यह बात बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र शास्त्री ने कही। पं. धीरेन्द्र शास्त्री परसवाड़ा के भादुकोटा में वनवासी रामकथा को संबोधित कर रहे थे। भादुकोट में दो दिवसीय २३ व २४ मई को वनवासी रामकथा का आयोजन किया गया।
मंगलवार को शाम ६ बजे से रामकथा का वाचन करने के दौरान पं. धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि जब देश पर अंग्रेज अत्याचार कर रहे थे, तब इसी जंगल से भगवान बिरसा मुंडा ने विरोध का बिगुल फूंका था। बीड़ा उठाकर अंग्रेजों को लोहे के चने चबाने पर मजबूर कर दिया था। उन्होंने बालाघाट में स्वयं की कथा होने पर आदिवासियों के विचलित हो जाने पर हाईकोर्ट में लगाई गई याचिका पर कहा कि वे लोग भी अंग्रेज जैसे ही है, लेकिन धन्य है बालाघाट। यहां पागलों ने वनवासी रामकथा का आयोजन करा दिया। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा की तरह ही फिर से जंगल से क्रांति उठेगी और हिंदू विरोधी ताकतों को उखाड़ फेंकेंगी। उन्होंने कहा कि वनवासी रामकथा में बालाघाट के पागलों का झुंड है। इसके अलावा उन्होंने अनेक बातें कही।
बुधवार को वनवासी रामकथा के पूर्व दिव्य दरबार का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा के समक्ष अपनी अर्जी लगाई। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने पीडि़तों की समस्या सुनी, उनका समाधान भी बताया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।