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भागवत कथा का ग्रामीण कर रहे रसपान

महकेपार में मनाया जा रहा कार्तिक पूर्णिमा महोत्सव-

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भागवत कथा का ग्रामीण कर रहे रसपान

भागवत कथा का ग्रामीण कर रहे रसपान

तिरोड़ी/महकेपार। पठार अंचल के ग्राम महकेपार में इस साल भी कार्तिक पूर्णिमा महोत्सव बड़े ही धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर संगीतमय भागवत कथा का आयोजन भी किया गया है। जिसमें संत ज्ञानेश्वर आश्रम से पधारे रामायणचार्य भागवत मर्मज्ञ बांगरे महाराज अपने मुखारबिंद से भागवत कथा का वाचन कर रहे हैं। मंगलवार को स्थापना तथा घंटी प्रांरभ के साथ ही कथा का शुभारंभ हुआ। ग्रामीण बड़ी संख्या में भागवत कथा स्थल में पहुंचकर कथा का रसपान कर रहे हैं। भागवत कथा के दूसरे दिन महाराज ने महाराज ने कहा कि कलियुग में श्रीमद् भागवत महापुराण श्रवण कल्पवृक्ष से भी बढ़कर है। क्योंकि कल्पवृक्ष मात्र तीन वस्तु अर्थ, धर्म और काम ही दे सकता है। मुक्ति और भक्ति नही दे सकता है। लेकिन श्रीमद् भागवत तो दिव्य कल्पतरु है यह अर्थ, धर्म, काम के साथ-साथ भक्ति और मुक्ति प्रदान करके जीव को परम पद प्राप्त कराता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत केवल पुस्तक नही साक्षात श्रीकृष्ण स्वरुप है, इसके एक-एक अक्षर में श्रीकृष्ण समाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि कथा सुनना समस्त दान, व्रत, तीर्थ, पुण्यादि कर्मो से बढ़कर है। धुन्धकारी जैसे शराबी, कवाबी, महापापी, प्रेतआत्मा का उद्धार हो जाता है। उन्होंने कहा कि भागवत के चार अक्षर इसका तात्पर्य यह है कि भा से भक्ति से ज्ञान, व से वैराग्य और त त्याग जो हमारे जीवन में प्रदान करे उसे हम भागवत कहते है। इसके साथ-साथ भागवत के छह प्रश्न, निष्काम भक्ति, 24 अवतार श्री नारद जी का पूर्व जन्म, परीक्षित जन्म, कुन्ती देवी के सुख के अवसर में भी विपत्ति की याचना करती है। क्योंकि दुख में ही तो गोविन्द का दर्शन होता है। जीवन की अंतिम बेला में दादा भीष्म गोपाल का दर्शन करते हुए अद्भुगत देह त्याग का वर्णन किया। साथ साथ परीक्षित को श्राप कैसे लगा तथा भगवान श्री शुकदेव उन्हें मुक्ति प्रदान करने के लिए कैसे प्रगट हुए इत्यादि कथाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। इस दौरान कथा के बीच-बीच में भाव-विभोर करने वाले भजनों को सुनकर भक्त मंत्रमुग्ध हो गए।