बलिया. कालाधन को खत्म करने के लिए पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले से कई परिवारों पर खासा असर पड़ा है। छोटे कारोबारी और किसाने इस फैसले से त्रस्त हैं। छोटे कारोबारियों को ही रही पैसे की किल्लत के बाद बलिया में वह सूदखोरों के चंगुल में फंसते जा रहे हैं।
नोटबंदी का सबसे बुरा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है जो परिवार रोजमरा की जिन्दगी नगद लेनदेन पर आश्रित हैं। बलिया के सब्जी मंडी में थोक व्यापारियों से छोटे व्यवसायी सब्जी खरीदते और उसकी बिक्री फुटकर में करते हैं, लेकिन नोटबंदी का आलम यह है कि छोटे व्यापारी पैसे के आभाव में सूदखोरों के चंगुल में फंसते जा रहे है और नोट बंदी से इनकी कमर टूट गई है।
सूदखोर बैंकों से जुगाड़ लगा कर मनमानी रकम निकलवा रहे हैं। किसानों का कहना है कि 5 -10 प्रतिशत सूद लेकर वह खेती कर रहे हैं, सूद के रूप में फसल कटाई के बाद वह अनाज से भरपाई करेंगे। किसानों ने कहा कि अगर यही आलम रहा तो 2017 विधान सभा चुनाव में वह बीजेपी का विरोध करेंगे।
वहीं इस मामले में रीजनल बैंक मैनेजर रणजीत सिंह का कहना है कि सूदखोरों से आसानी से पैसे किसानों को मिल गए होंगे, जिससे कुछ ही किसान इनके चंगुल में चले गए होंगे। जैसे ही स्थिति सामान्य होगी, सब कुछ ठीक हो जायेगा।
पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले के बाद लोगों की आस थी कि ब्लैकमनी पर लगाम लगेगा और देश की दिशा और दशा दोनों में काफी कुछ परिवर्तन होगा, लेकिन यह फैसला गरीबों और छोटे कारोबारियों के लिए आफत से कम नहीं है।