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Chhattigarh News: बालोद में रोजाना 300 चमगादड़ों की मौत, 5 दिनों से जारी है सिलसिला, बदबू से लोग परेशान

Balod News: छत्तीसगढ़ में पड़ रही भीषण गर्मी के चलते बालोद के बीएसपी एमवीटी सेंटर हर दिन सैकड़ों की संख्या में चमगादड़ों की मौत हो रही है। बता दें कि बीते 5 दिनों से लगातार मामले सामने आ रहे हैं..

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Balod News, Chhattisgarh News

बालोद में रोजाना 300 चमगादड़ों की मौत ( Photo - Patrika )

Chhattisgarh News: नगर के बीएसपी एमवीटी सेंटर के पास लगे पुराने पेड़ चमगादड़ों के लिए कब्रगाह बनते जा रहे हैं। भीषण गर्मी और 45 डिग्री तापमान के चलते पिछले कई वर्षों से यहां रोजाना सैकड़ों चमगादड़ पेड़ से गिरकर दम तोड़ रहे हैं। आलम यह है कि ( Balod News ) नगर पालिका के सफाई कर्मचारी हर सुबह पेड़ के नीचे मरे पड़े करीब 300 चमगादड़ों को ट्रॉली में भरकर निस्तारण के लिए ले जा रहे हैं। यह सिलसिला पिछले 5 दिनों से चल रहा है।

राहगीर नाक बंद कर निकलने को मजबूर

एमवीटी सेंटर मार्ग दल्लीराजहरा का व्यस्त रास्ता है। माइंस जाने वाले कर्मचारी और वार्डवासी इसी रास्ते से गुजरते हैं। पेड़ के नीचे सड़े हुए चमगादड़ों से उठने वाली तेज बदबू के कारण लोगों का निकलना दूभर हो गया है। राहगीर रुमाल या गमछे से नाक ढंककर निकलते हैं।

Balod News: पर्यावरणविदों ने जताई चिंता

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ रहा तापमान और पेड़ों की घटती संख्या वन्यजीवों के लिए खतरनाक हो रही है। चमगादड़ पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये कीट नियंत्रण और परागण में मदद करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में मौत चिंताजनक है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि पेड़ों के आसपास पानी की व्यवस्था और छायादार टिन शेड लगाए जाएं तो कुछ चमगादड़ों की जान बचाई जा सकती है।

Weather News: तपिश से बेहाल होकर गिर रहे चमगादड़

स्थानीय लोगों ने बताया कि एमवीटी सेंटर के पास लगे विशाल नीलगिरी और बरगद के पेड़ों पर हजारों की संख्या में चमगादड़ों का बसेरा है। अप्रैल-मई में तापमान 44 से 45 डिग्री तक पहुंचते ही ये चमगादड़ हीट-स्ट्रोक का शिकार हो जाते हैं। दोपहर में लू के थपेड़ों के बीच ये बेहोश होकर सीधे जमीन पर आ गिरते हैं। पेड़ के नीचे सुबह-सुबह मरे हुए चमगादड़ों का ढेर लग जाता है। वार्ड के रहवासियों का कहना है कि यह सिलसिला पिछले 5-6 सालों से हर गर्मी में चल
रहा है।

नगर पालिका रोज उठा रही 300 शव

नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों ने बताया कि वे रोज सुबह 6 बजे ही पेड़ के नीचे पहुंच जाते हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली में मरे चमगादड़ों को भरकर शहर से दूर डंपिंग यार्ड में गड्ढा खोदकर दफनाया जाता है। उन्होंने बताया कि रोज 250 से 300 चमगादड़ मर रहे हैं। कभी-कभी संख्या 300 तक पहुंच जाती है। इतनी बदबू आती है कि बिना मास्क काम करना मुश्किल है।

प्रतिदिन मरे हुए चमगादड़ों को उठाया जा रहा

नगर पालिका दल्लीराजहरा के उपाध्यक्ष मनोज पिंटू दुबे ने कहा कि सफाई कर्मचारियों को भेज कर प्रतिदिन मरे हुए चमगादड़ को उठाया जा रहा है। साथ ही स्थान पर ब्लीचिंग पाउडर का छिडक़ाव किया जा रहा है और मरे हुए चमगादड़ को शहर से बाहर ले जाकर गड्ढे में डिस्पोज किया जा रहा है। पूरी सुरक्षा अपनाई जा रही है।

नगर पालिका कर रही ब्लीचिंग पाउडर का छिडक़ाव

चमगादड़ों के शवों से उठने वाली दुर्गंध और संक्रमण के खतरे को देखते हुए निकाय ने एमवीटी सेंटर के आसपास रोज ब्लीचिंग पाउडर का छिडक़ाव शुरू कर दिया है। वही बीएसपी के स्वास्थ्य विभाग की टीम पेड़ के नीचे और आसपास के क्षेत्र को सैनिटाइज कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण न फैले, इसलिए यह कदम उठाया गया है।