उक्त आवासों को तोड़े जाने से प्रभावित एवं पीडि़त विधवा बुजुर्ग शंकरम्मा अपने 22 वर्षीय बेटी के साथ बेघर हो गई है। इसी तरह परित्यक्ता लक्ष्मी भी अपने 11 वर्षीय बेटे के साथ बेघर हुई है, साथ ही परित्यक्ता 33 वर्षीय पुष्पा, परित्यक्ता 65 वर्षीय सावित्री एवं परित्यक्ता सुमित्रा का भी आशियाना छीन गया है। इनमें सुमित्रा को न तो पेंशन मिलता है और न ही गरीबी रेखा सूची में उसका नाम है, जिससे उसकी परेशानियां और भी बढ़ गई है।
बिजली विहीन मकानों में रह रहे थे
प्रभावित महिलाओं ने बताया कि राजहरा नगर में इनके पास कहीं भी रहने की और कोई जगह या मकान नहीं है, इसीलिए वे कई महीनों से रेलवे के इन खंडहरनुमा एवं बिजली विहीन मकानों में रह रहे थे। आसपास के घरों व दुकानों में झाड़ू पोंछा और बर्तन मांजने धोने का काम करते हुए जीवन यावन कर रही हैं। अब इन मकानों को तोड़ जाने से अब उन्हें दूसरा घर तलाश करना पड़ेगा। इनमें से दो परिवार को पालिका ने ठिकाना दिया।