
बालोद. राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजना राजमाता विजयराजे कन्या विवाह योजना में जिले में जमकर फर्जीवाड़ा हुआ है। जांच में इस फर्जीवाड़े की परत-दर-परत खुलकर सामने आ रही है। स्थिति को देखते हुए अब श्रम विभाग फर्जी दस्तावेजों के सहारे योजना का लाभ लेने वाले 15 हितग्राहियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी कर रहा है।
'पत्रिकाÓ ने राजमाता विजयाराजे कन्या विवाह योजना में जमकर गड़बड़ी होने की बात पहले ही समाचार प्रकाशित कर शासन-प्रशासन को बता थी। इसके बाद श्रम विभाग की जांच में हाथ आए सबूत ने इसकी पुष्टि भी कर दी। योजना के तहत कन्या विवाह के लिए मिलने वाली 20 हजार की राशि के लिए अपनाए गए हथकंडों पर अब श्रम विभाग के अधिकारी थाने में एफआईआर दर्ज कराकर अन्य लोगों के लिए कड़ा संदेश देने की तैयारी कर रहे हैं।
योजना के तहत मिले 1018 आवेदन
बीते साल अप्रैल, मई, जून माह में राजमाता विजयाराजे कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 1018 आवेदन आए थे। श्रम विभाग ने जब आवेदनों की जांच शुरू की तो फर्जीवाड़े सामने आने लगा। विभागीय अमले ने अब तक 374 आवेदनों का ही स्थल परीक्षण किया है, जिसमें से 262 आवेदन फर्जी पाए गए, जिन्हें निरस्त कर दिया गया है। मात्र 107 आवेदन ही सही पाए गए हैं। श्रम विभाग को अभी भी 644 आवेदनों की जांच करना है।
15 आवेदनों में तो पूरे दस्तावेज फर्जी
श्रम विभाग की जांच में अब तक 15 आवेदन ऐसे मिले हैं, जिसमें योजना के तहत मिलने वाली रकम के लिए पूरा दस्तावेज फर्जी बनाकर जमा किए गए थे। इनमें देवबती, रूप लाल, श्याम बिहारी, राम स्वरूप, हेमलता, गायत्री बाई, बिसमत बाई, अंजनी, ललिता सिन्हा व धनेश्वरी शामिल हैं। श्रम विभाग अब इन 15 लोगों के खिलाफ नजदीकी थाना में एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में जुटा हुआ है।
श्रम अधिकारी बालोद अशोक चौरसिया ने बताया कि राजमाता विजयाराजे कन्या विवाह योजना अंतर्गत जितने आवेदन आए थे, सभी की जांच की जा रही है। 1018 आवेदनों में से 374 की जांच में 262 आवेदन फर्जी पाए गए हैं। शेष आवेदनों की जांच चल रही है। फर्जी आवेदन देकर जमा कर योजना का लाभ लेने का प्रयास करने वाले 15 लोगों पर एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी चल रही है। गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम मडिय़ापार में एक मां ने योजना का लाभ पाने हद ही पाद कर दी।
हेमलता यादव ने अपनी 8 साल की बच्ची रीना के विवाह का फर्जी कार्ड बनवाया और आवेदन जमा किया। मामले की जांच करने श्रम निरीक्षक रमेश मंडावी ने गांव जाकर पूछताछ की तो पता चला की शादी कार्ड में जिस रीना का नाम लिखा है, वह तीसरी कक्षा में पढ़ाई करती है। वहीं दूसरी बेटी लता यादव का विवाह 6 मई 2017 को नहीं बल्कि सन् 2016 में ही हो गया था। इस तरह से महिला दोनों बेटी के नाम से 20-20 यानी 40 हजार रुपए इस योजना से निकालना चाह रही थी।
जिला मुख्यालय से लगे ग्राम जुंगेरा में चुनेश्वरी ने भी शादी का कार्ड लगाकर 6 फरवरी 2017 को अपनी शादी होना बताया। इस मामले की जांच करने पर पता चला की उनकी शादी 6 फरवरी 2017 को नहीं बल्कि 7 मई 2015 को हुई थी। सिर्फ योजना में मिलने वाले 20 हजार रुपए के लिए ही फर्जी शादी कार्ड छपवाकर दस्तावेज जमा किए।
गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम खर्रा में बिसमत बाई में अपनी दो बेटी की शादी 4 जून 2017 को होने का शादी कार्ड छपवाया और इस योजना का लाभ लेने फर्जी दस्तावेज जमा कर आवेदन दिए। आवेदन की जांच करने पर पता चला की सजनी नाम की लड़की की शादी हुई है, लेकिन राजश्री नाम की उनकी पुत्री है ही नहीं।
Published on:
16 Jan 2018 01:10 pm
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