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संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पहली बार हिंदुत्व को नहीं, साझी संस्कृति को बताया भारत का चेहरा

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पहली बार हिंदुत्व को नहीं बल्कि साझी संस्कृति को भारत का चेहरा बताया है। यह बात मोहन भागवत ने एकसभा में कहीं।

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RSS Chief Mohan Madhukar Bhagwat

संघ प्रमुख भागवत बोले - देश का डीएनए एक यहां नहीं चलता है अलगाववाद

रायपुर . आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पहली बार हिंदुत्व को नहीं बल्कि साझी संस्कृति को भारत का चेहरा बताया है। राजधानी के साइंस कॉलेज मैदान में सोमवार को एक जनसभा में उन्होंने देश में नस्ल, भाषा, पंथ, संप्रदाय और क्षेत्र के आधार पर बढ़ रहे अलगाववाद पर वैचारिक हमला किया।

उन्होंने कहा, पिछले 40 हजार वर्ष से अफगानिस्तान से लेकर म्यांमार तक और तिब्बत की ढलानों से लेकर श्रीलंका के दक्षिणी छोर तक भारत एक रहा है। पूर्वज एक रहे हैं। पूरे देश का डीएनए एक है। भारत का चेहरा बोली, भाषा, पंथ-संप्रदाय नहीं बल्कि संस्कृति है, जो अलग-अलग बोली-भाषा, पंथ-संप्रदाय के बावजूद भारत को जोड़ती है।

उन्होंने कहा, यहां अलगाववाद चलता नहीं है। राजनीतिक स्वार्थों के लोग देश को एेसा विभत्स रूप देने के लिए प्रचार करते होंगे, लेकिन जब बात देश की आती है तो अंदर की बात बाहर आ ही जाती है। उन्होंने कहा, भारत नहीं रहेगा तो आप और हम भी नहीं रह सकते। देश की एकता-अखंडता के बीच आने वाली कोई चीज दुखदाई है।

पुस्तक सेपियंस के दृष्टांतों से समझाई बात

- सत्ता की सुरक्षा के लिए लोगों ने समूह बनाए। लेकिन यह एकता ज्यादा दिन नहीं चली। सत्ता एक कृत्रिम चीज है। इससे आप लोगों को देर तक जोड़े नहीं रख सकते।

- धर्म के नाम पर समूह बने। लेकिन सबका एक धर्म नहीं हो सकता। हमारा मत सही है, दूसरों का गलत है, यह गलत धारणा है। एेसे में यह एकता भी ज्यादा दिन नहीं चली।

- व्यापार भी एक चीज है, जिसके चलते समूह बनते हैं। लेकिन उसमें स्वार्थ रहता है। बाजार मनुष्य को जोड़ नहीं सकता, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति का स्वत्व अलग है।

कहानी सुनाकर बताया हम आदिवासियों के वंशज
भागवत ने गुजराती साहित्यकार धु्रव भट्ट का एक दृष्टांत सुनाया। कहा, एक आदिवासी गांव के मुखिया के बेटे को तेंदुआ उठाकर ले गया। वन विभाग के लोग पूछने गए। उसने कहा, तेंदुआ एेसा करता नहीं है। जरूर उसको दो-तीन दिनों से कुछ खाने को नहीं मिला होगा तभी मेरे बच्चे को ले गया। यही हमारा स्वभाव है। हम उन्हीं के वंशज हैं।