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हरेली त्यौहार : छत्तीसगढ़ के इस गांव के हर घर में बनाए जाते हैं गेड़ी

जिला मुख्यालय सहित ब्लॉक मुख्यालयों एवं पंचायतों में गेड़ी दौड़, मटका फोड़, खो-खो, फुगड़ी, 100 मीटर दौड़, रस्सा खींच जैसे विभिन्न खेल आयोजन भी किए जाएंगे। इस बार राज्य सरकार की विशेष पहल पर हरेली तिहार छत्तीसगढ़ी कलेवर और छत्तीसगढ़ी रंग से सजा-संवरा नजर आएगा।

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हरेली त्यौहार : छत्तीसगढ़ के इस गांव के हर घर में बनाए जाते हैं गेड़ी, गेड़ी दौड़, फुगड़ी और खो-खो खेल के साथ छत्तीसगढ़ व्यंजन का लुत्फ भी उठाएंगे

बालोद@Patrika. छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार हरेली (Hareli festival) इस बार धूमधाम और हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस बार राज्य सरकार की विशेष पहल पर हरेली तिहार छत्तीसगढ़ी कलेवर और छत्तीसगढ़ी रंग से सजा-संवरा नजर आएगा। (Hariyali amavashya) पारंपरिक वेशभूषा के साथ जिले के अंचलों में गेड़ी दौड़, मटका फोड़, रस्सा खींच और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्वाद के साथ बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार इस वर्ष राज्य शासन द्वारा जहां हरेली पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई है। (Balod patrika) वहीं कृषि पर आधारित इस त्यौहार को हरेली तिहार के माध्यम से छत्तीसगढ़ी संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से भी मनाने का निर्णय लिया गया है। जिला मुख्यालय सहित ब्लॉक मुख्यालयों एवं पंचायतों में गेड़ी दौड़, मटका फोड़, खो-खो, फुगड़ी, 100 मीटर दौड़, रस्सा खींच जैसे विभिन्न खेल आयोजन भी किए जाएंगे।

जिले के ग्राम लिमगोटा में हर घर में बनाए जाते हैं गेड़ी
बालोद. जिले के डौंडीलोहारा विकास खंड के ग्राम चिलमगोटा में हरेली त्यौहार पर घर घर में गेड़ी बनाए जाने की परंपरा आज भी जीवित है। ग्रामीणों के अलावा स्कूल के शिक्षक भी बच्चों को गेड़ी सिखाते है। स्कूल में गेड़ी दौड़, गिल्ली डंडा खेल के अलावा छत्तीसगढ़ की पारंपरिक व्यंजन ठेठरी, खुरमी, बड़़ा, सोहारी परोसे जाएंगे।

प्रदेश के अलावा देश में भी बनेगी गेड़ी की पहचान
ग्राम चिलमगोटा का गेड़ी नृत्य पूरे छत्तीसगढ़ के अलावा देश के विभिन्न प्रांतों में भी अपनी पहचान बना चुकी है। सन 2010 में गांव के स्कूली बच्चों को शिक्षक सुभाष बेलचन्दन ने बच्चों को जागरूक किया। जिसके बाद बच्चों को गेड़ी में नृत्य करना भी सिखाया। पहली बार स्कूल स्तरीय आयोजन में गेड़ी नृत्य की प्रस्तुति में जीत के बाद लगातार विभिन्न मंचों पर प्रस्तुति की परंपरा आज भी जारी है।

बांस गीत करमा के साथ राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति
राज्य स्तरीय हरेली तिहार में राजधानी में गेड़ी नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। सुभाष बेलचंदन ने बताया कि गेड़ी नृत्य भी प्रदेश की संस्कृति में से एक है। इसे बांस गीत करमा लोगगीत के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्र गुदुम, डमरू, डफरा के अलावा बेंजों की मधुर ध्वनि के साथ प्रस्तुत की जाती है। हाल ही में इस गांव के 10 कलाकारों ने असम के गुवाहाटी में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय लोक नृत्य महोत्सव में प्रस्तुति दी। इसके अलावा मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हरेली जगार में भी प्रस्तुति दी जा चुकी है।

हरेली गीत में झूम के नाचे प्राथमिक शाला चिटौद के 186 बच्चे व शिक्षक
बालोद संकुल केंद्र पुरूर के शासकीय प्राथमिक विद्यालय चिटौद में हरेली त्यौहार की पूर्व संध्या पर विभिन्न खेलकूद व सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। शिक्षक एवं कार्यक्रम के संयोजक ईश्वरी कुमार सिन्हा ने बताया कि कि कक्षा पांचवीं की शिक्षिका लिकेश्वरी मार्कंडेय, कामिन साहू के मार्गदर्शन में छात्राओं ने फुगड़ी में हिस्सा लिया। कक्षा दूसरी की शिक्षिका कामिन यादव व राजेश्वरी पंचागम के निर्देश में विद्यार्थियों ने कबड्डी में हुनर दिखाए। कक्षा पांचवी के कामता साहू व कौशल साहू एवं सेवती एवं दिव्या के नेतृत्व में सामुहिक नृत्य प्रस्तुत की।

हरेली गीतों पर बच्चों के संग शिक्षक भी झूमे
स्कूल के 186 छात्र-छात्राओं ने प्रांगण में हरेली गीत 'होगे बियासी नागर धोआगेÓ और 'आगे-आगे हरेली तिहारÓ में नृत्य प्रस्तुत किया। बच्चों के संग हरेली पर्व के संबंध में सामान्य प्रश्नोत्तरी परिचर्चा भी हुई।

ग्रामीण अंचलों में कुलदेवता सहित ग्राम देवता की होगी पूजा
हरेली तिहार के दिन कुलदेवता की पूजा की जाती है। हरेली पर किसान नागर, गैंती, कुदाली, फावड़ा समेत कृषि औजारों की साफ-सफाई कर उसे घर के आंगन में रखकर पूजा-अर्चना करेंगे। इस अवसर पर सभी घरों में गुड़ का चीला बनाया जाएगा। हरेली के दिन ज्यादातर लोग कुल देवता और ग्राम देवता की पूजा करेंगे।

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